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दीपावली रोशनी का त्योहार, पटाखे जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा- त्यौहार पर मिठाई और मिठास के द्वारा भी लोगों को साथ जोड़ा जा सकता है

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दीपावली रोशनी का त्योहार, पटाखे जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. पटाखों की बिक्री पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  2. कोर्ट ने कहा दिल्ली में 20 से 25 फ़ीसदी बच्चे अस्थमा से ग्रस्त
  3. मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी
नई दिल्ली: देश भर में पटाखों की बिक्री पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दीपावली रोशनी का त्योहार है. लोगों को साथ लाने के लिए पटाखों की जरूरत नहीं है. मिठाई और मिठास के द्वारा भी लोगों को साथ जोड़ा जा सकता है.

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एके सीकरी ने कहा मेरी पोती जो चार साल की है पिछले साल दीवाली पर सभी को पटाखे जलाने से मना कर रही थी. कह रही थी कि पटाखे मत चलाओ, नहीं तो जेल चले जाओगे. इस मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी.

यह भी पढ़ें : पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

पटाखों की बिक्री पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा वो तय करेगा कि दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए या इसे रेगुलेट किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में 20 से 25 फ़ीसदी बच्चे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं. यहां तक कि नवजात बच्चों को भी समस्याएं हो रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नवजात बच्चे फेफड़े की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं और इसका कारण प्रदूषण है.

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VIDEO : पटाखों से दिल्ली की आबोहवा पर ज्यादा असर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो पहलुओं पर गौर करना है. पहला पटाखों से कितना प्रदूषण होता है और इसे कंट्रोल करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं. दूसरा हमें उस बात का भी ध्यान रखना है कि त्यौहार को मनाना लोगों के जीवन का एक हिस्सा है.


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