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दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामला : पांच जजों के संविधान पीठ में सुनवाई शुरू

1991 में एक्ट के जरिए इसे स्पेशल स्टेटस दिया गया. इसके दिल्ली की अपनी चुनी हुई सरकार होगी.  239 AA के तहत उपराज्यपाल को कोई भी फैसला लेने से पहले दिल्ली की सरकार की सहमति लेनी होगी.

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दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामला : पांच जजों के संविधान पीठ में सुनवाई शुरू

सुप्रीम कोर्ट

पटना: दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के मामले में दिल्ली सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. दिल्ली सरकार की ओर से गोपाल सुब्रमण्यम बहस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, हम इस बात से सहमत हैं दिल्ली राज्य नहीं बल्कि केंद्रशासित प्रदेश है. 1991 में एक्ट के जरिए इसे स्पेशल स्टेटस दिया गया. इसके दिल्ली की अपनी चुनी हुई सरकार होगी.  239 AA के तहत उपराज्यपाल को कोई भी फैसला लेने से पहले दिल्ली की सरकार की सहमति लेनी होगी. उन्होंने कहा कि 239 AA से पहले संसद दिल्ली के लिए कानून बनाती थी लेकिन इसके लागू होने के बाद भी अगर केंद्र के पास ये अधिकार रहेगा तो इसका मतलब है कि पहले के कानून की छाया अभी भी बरकरार है.

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 239AA के तहत दिल्ली को विशेष दर्जा दिया गया है. 239 AA में दर्जा दिया गया है. उसकी व्याख्या करनी चाहिए. दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वक़ील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि 239AA के मुताबिक सरकार का मतलब क्या है? दरअसल ये कहता है कि एक चुनी हुई सरकार जो जनता के लिए जवाबदेह हो. 

239AA के तहत दिल्ली में मुख्यमंत्री, मंत्रियों का समूह और विधानसभा को बनाया गया. गोपाल ने कहा कि दिल्ली की विधायिका भी दूसरे राज्यों की विधायिका के तरह है. 239AA के तहत अगर मंत्रियों के समूह द्वारा लिए गए निर्णय से अगर LG सहमत नहीं होते तो फिर मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. जिसका मतलब हर बात के लिए LG से अनुमति लेनी होगी. ऐसे में LG के पास पूरा कंट्रोल आ जाता है. जबकि चुनी हुई सरकार की भी जनता के प्रति जवाबदेही है.


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