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दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, नजीब मामले को लेकर CBI में दिलचस्पी का अभाव

न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर की पीठ ने कहा कि ‘किसी रूप में कोई परिणाम नहीं है. कागजों पर भी कोई परिणाम नहीं निकला.’

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दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, नजीब मामले को लेकर CBI में दिलचस्पी का अभाव

15 अक्तूबर, 2016 से लापता है नजीब अहमद

खास बातें

  1. 15 अक्टूबर 2016 से लापता है नजीब अहमद
  2. अदालत ने पांच महीने पहले जांच सीबीआई को सौंपी थी
  3. सीबीआई इस मामले में अब तक कोई सुराग नहीं खोज पाई
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने आज कहा कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले की जांच में सीबीआई की ओर से ‘दिलचस्पी का पूरी तरह अभाव’ रहा है. अदालत ने मामले की जांच पांच महीने पहले सीबीआई को सौंपी थी.

जेएनयू के छात्र नजीब के लापता होने के एक साल बाद भी सीबीआई के हाथ खाली

न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर की पीठ ने कहा कि ‘किसी रूप में कोई परिणाम नहीं है. कागजों पर भी कोई परिणाम नहीं निकला.’ सीबीआई द्वारा अदालत में कही गई बातों और उसकी स्थिति रिपोर्ट में विरोधाभास मिलने के बाद अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है. सीबीआई ने मामले में संदिग्ध छात्रों के फोन कॉल और संदेश के विश्लेषण के आधार पर स्थिति रिपोर्ट दी है.

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अदालत लापता छात्र नजीब की मां फातिमा नफीस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. फातिमा ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह जेएनयू के माही-मांडवी छात्रावास से 15 अक्तूबर, 2016 को लापता बेटे का पता लगाने के लिए आदेश जारी करे.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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