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25 साल पहले बहू को जलाकर मार डालने के आरोप में सास-ससुर, ननद को मिली उम्रकैद हाईकोर्ट ने रद्द की

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25 साल पहले बहू को जलाकर मार डालने के आरोप में सास-ससुर, ननद को मिली उम्रकैद हाईकोर्ट ने रद्द की
नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में एक दंपति और उनकी बेटी को निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है. मामला वर्ष 1991 का है, जिसमें उन पर बहू को जलाकर मार डालने का आरोप लगा था. न्यायालय के फैसले से हत्या के मामले में उनकी 25 साल की 'लंबी कैद' और दु:स्वप्न का अंत हो गया.

न्यायमूर्ति गीता मित्तल और अनु मल्होत्रा की पीठ ने निचली अदालत द्वारा वर्ष 2000 में दिए गए फैसले को रद्द कर दिया. निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान मार्च, 2003 में सास की मौत हो गई थी और उनके खिलाफ मामला खत्म कर दिया गया था.

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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष दंपति और उनकी बेटी के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है और वर्तमान सबूतों को देखते हुए निचली अदालत ने उनके खिलाफ जो फैसला दिया है, वह सुसंगत नहीं है.


अंतिम समय में महिला ने पुलिस को दो बयान दिए थे. एक में उसने कहा था कि उनके कपड़ों में आग खाना बनाते वक्त लगी, जबकि दूसरे बयान में महिला ने अपने सास-ससुर और ननद पर जलाने का आरोप लगाया था.



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