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अफसरों का सिसोदिया पर पलटवार, कहा- राशन मामले में देरी हमारी नहीं, आपके मंत्री की वजह से हुई

अफसरों ने एक बयान जारी कर कहा कि 'संशोधित कैबिनेट नोट 19 फरवरी को खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन को भेज दिया था. ये प्रस्ताव 27 फरवरी तक मंत्री के यहां लंबित रहा.

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अफसरों का सिसोदिया पर पलटवार, कहा- राशन मामले में देरी हमारी नहीं, आपके मंत्री की वजह से हुई

मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बुधवार को कैंडल मार्च निकाला था.

नई दिल्ली: दिल्ली के अफसरों ने डिप्टी सीएम के आरोपों पर पलटवार करते हुए दावा किया है कि राशन की डोरस्टेप डिलीवरी के प्रस्ताव बनाने में देरी अधिकारियों की वजह से नहीं बल्कि खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन के चलते हुई है, क्योंकि वो फ़ाइल दबाकर बैठे रहे. अफसरों ने एक बयान जारी कर कहा कि 'संशोधित कैबिनेट नोट 19 फरवरी को खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन को भेज दिया था. ये प्रस्ताव 27 फरवरी तक मंत्री के यहां लंबित रहा. जैसे ही मंत्री जी से संशोधित प्रस्ताव विभाग को 27 फरवरी को मिला तुरंत ही कैबिनेट नोट योजना,लॉ, वित्त और खाद्य एवं अपमिश्रण विभाग के पास वैधानिक टिप्पणियों के लिए भेज दिया गया.'

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इससे पहले दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर राशन माफ़िया से मिले होने का आरोप लगाया था, जिसकी मुख्य वजह यह थी कि मुख्य सचिव ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी का प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट को नहीं दिया. सिसोदिया ने कहा कि 'मुख्य सचिव को 20 फरवरी को हुई कैबिनेट की बैठक में कहा गया था कि राशन की डोरस्टेप डिलीवरी पर प्रस्ताव लेकर आएं, लेकिन 27 फरवरी की कैबिनेट बैठक में उन्होंने प्रस्ताव नहीं दिया. इसके बाद उनको 2 दिन बाद यानी 1 मार्च की कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने को कहा गया, लेकिन प्रस्ताव तैयार नहीं हुआ इसलिए गुरुवार को कैबिनेट की बैठक रद्द करनी पड़ी.'

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मनीष सिसोदिया से जब पूछा गया कि क्या जो मुख्य सचिव के साथ हुआ वो मामला राशन से जुड़ा हुआ था? तो सिसोदिया बोले 'ये सारा का सारा मामला है तो राशन माफिया से जुड़ा हुआ है. अभी ऐसी क्या मजबूरी थी कि बिना मंत्री से पूछे फ़ूड कमिश्नर को छुट्टी पर भेज दिया, जबकि जब हम एलजी से मिले थे तो ये तय हुआ कि वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पे भेजने से पहले मंत्री और मुख्यमंत्री से पूछा जाएगा' और जब सिसोसिया आए पूछा गया कि मुख्य सचिव मारपीट का आरोप लगा रहे हैं तो वे बोले 'बात तो वहीं हुई थी.'

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सिसोसिया के आरोपों पर अफसरों ने कहा कि 'ये प्रस्ताव विभाग के पास लंबित नहीं रहा, जबकि मंत्री जी के निर्देशों में बार-बार परिवर्तन हुआ, जिससे कि कैबिनेट नोट का तथ्य बदलता गया और हर बार सम्बद्ध विभाग की टिप्पणी लेने की नए सिरे से ज़रूरत पड़ी यानी जो भी देरी हुई वो मंत्री जी के बार बार निर्देश बदलने के कारण हुई'. खाद्य और नागरिक आपूर्ति कमिश्नर के छुट्टी पे जाने को लेकर सिसोदिया के सवाल पर अफसरों ने कहा कि 'छुट्टी पे जाने का मतलब ये नही होता कि पद रिक्त हो गया, बल्कि उसकी जगह कोई दूसरा अफ़सर काम करता है. ये मानवीय गरिमा के विरुद्ध है कि खाद्य और नागरिक आपूर्ति कमिश्नर छुट्टी पर क्यों गए'?


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