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दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री गिरोह का किया पर्दाफाश किया, मास्‍टरमाइंड फरार

पुलिस के मुताबिक यहां से करीब 40 हज़ार से ज्यादा फ़र्ज़ी डिग्रियां बेची जा चुकी हैं. गैंग का खुलासा तब हुआ जब राजस्थान के एक लड़के ने यहां से 10वीं की मार्कशीट लेकर उससे पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की और उसे पता चला कि मार्कशीट फ़र्ज़ी है.

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दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री गिरोह का किया पर्दाफाश किया, मास्‍टरमाइंड फरार

पुलिस ने पंकज नाम के शख्‍स को गिरफ्तार किया है

नई दिल्‍ली: दिल्ली में फर्जी डिग्री बेचने वाले एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ हुआ है. पता चला है कि इस गैंग ने 40 हज़ार से ज्यादा फर्जी डिग्रियां बेची हैं. 10 हज़ार में 10वीं, 20 हज़ार में 12वीं, 50 हज़ार में ग्रेजुएशन और 1 लाख में डॉक्टर और इंजीनियर की डिग्री. हरि नगर 2 कमरे के एसआरकेएम शिक्षण संस्थान से ये फर्जी डिग्रियां तैयार हो रही थीं. पुलिस के मुताबिक यहां से करीब 40 हज़ार से ज्यादा फ़र्ज़ी डिग्रियां बेची जा चुकी हैं. गैंग का खुलासा तब हुआ जब राजस्थान के एक लड़के ने यहां से 10वीं की मार्कशीट लेकर उससे पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की और उसे पता चला कि मार्कशीट फ़र्ज़ी है.

पुलिस ने यहां से पंकज नाम के एक शख्स को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की तो उसने बताया की उसके गैंग में कई लोग शामिल हैं, और ये फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट पंजाब में छापी जाती हैं. इसके बाद पुलिस ने पवित्र सिंह और छपाई करने वाले गोपालकृष्ण को गिरफ्तार कर लिया. इन सभी से पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग 30 से ज्यादा यूनिवर्सिटी, स्कूल और कॉलेज की फ़र्ज़ी वेबसाइट चला रहे हैं. अलग-अलग मार्कशीट और डिग्री के लिए 10 हज़ार से 1 लाख रुपये तक वसूलते थे. हर मार्कशीट फर्स्ट डिवीज़न की ही होती थी. अब तक 40 हज़ार से ज्यादा मार्कशीट बेच चुके हैं. इनके 30 बैंक खातों को भी सीज़ कर दिया गया है. इस फर्जीवाड़े से करोड़ों की कमाई की गई.

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पुलिस से बचने के लिए डिग्री या मार्क्सशीट बेचने का तरीका कुछ ऐसा था. दिल्‍ली पुलिस के डीसीपी विजय कुमार ने बताया, 'डिग्री प्रोवाइड कराने का तरीका ये था कि अगर साउथ इंडिया से कोई है तो उसे नॉर्थ इंडिया की यूनिवर्सिटी और कॉलेज की डिग्री, अगर ईस्ट से है तो वेस्ट इंडिया की, अगर वेस्ट की है तो ईस्ट की जिससे लोग फिजिकली जाकर उन्हें वेरीफाई न कर पाएं. फिर जब लोग सर्टिफिकेट या डिग्री को चेक करते हैं वेबसाइट पर तो उनको वेबसाइट पर प्रोवाइड करा दी जाती थी. चूंकि वो पूरी वेबसाइट ही फ़र्ज़ी है तो जब लोग उस पर ढूंढते थे तो सामने सर्टिफिकेट उसी वेबसाइट पर उपलब्ध रहते थे.

पुलिस के मुताबिक पंकज दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ा है और उसकी पत्नी डीयू में ही प्रोफेसर है. तीन साल से चल रहे इस गोरखधंधे के मास्टरमाइंड और कुछ और लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.


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