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दिल्ली : EWS के नाम पर अभिभावकों से खिलवाड़ कर रहीं निजी स्कूलें और सरकार

उन पेरेंट्स को बधाई देकर अपनी पीठ थपथपा रही केजरीवाल सरकार जिनके बच्चों के एडमिशन EWS कोटे में हुए ही नहीं

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दिल्ली : EWS के नाम पर अभिभावकों से खिलवाड़ कर रहीं निजी स्कूलें और सरकार

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. NDTV इंडिया ने की पड़ताल को सामने आई हकीकत
  2. गरीब कोटा वालों को निजी स्कूलों में घुसने भी नहीं दिया जा रहा
  3. सरकार औपचारिकता पूरी करके जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही
नई दिल्ली: दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के बच्चों के साथ प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त शिक्षा के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है. दिल्ली में गरीब लोगों के बच्चों को सरकार स्कूल तो अलॉट कर रही है लेकिन स्कूल बच्चों को दाखिला दे ही नहीं रहे. लेकिन केजरीवाल सरकार उन एडमिशन के लिए भी पेरेंट्स को बधाई दे रही है जो हुए ही नहीं.

हरदीप कौर अपनी 5 साल की बेटी को घर पर पढ़ाने को मजबूर हैं. दिल्ली के तिलक नगर के विष्णु गार्डन में रहने वाली हरदीप कौर और उनके पति मलकीत सिंह ने गरीब कोटा यानी EWS में प्राइवेट स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन दिया. जो स्कूल मिला उसने इनकी बेटी को KG में  दाखिला देने से मना कर दिया. मलकीत सिंह ने बताया 'पिछले साल भी हम ऐसे ही धक्के खाते रहे एजुकेशन डिपार्टमेंट के और स्कूल के. इस साल तो स्कूल के बाहर ही खड़ा रखा अंदर जाने ही नहीं दिया.'

इस परिवार का बीते साल भी जिस स्कूल में EWS कोटे से नाम आया उसने दाखिला नहीं दिया,  लेकिन बीते साल दिसंबर में मुख्यमंत्री केजरीवाल की स्कूल में दाखिले की बधाई वाली चिट्ठी ज़रूर आई जिसके बाद इस परिवार ने मुख्यमंत्री केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री सिसोदिया, सबको शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ.

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मलकीत सिंह की पत्नी हरदीप कौर ने बताया  कि 'हमने शिक्षा निदेशालय में शिकायत की लेकिन उन्होंने कहा कि हमने आपको लेटर दे दिया है और हमने स्कूल में पहुंचा दिया है. हमारा काम खत्म हो गया है. अब आप चाहे लड़ो या जो मर्ज़ी करो, हमको उससे कोई मतलब नहीं. हम आपका एडमिशन कराने थोड़ी जाएंगे.'

दरअसल ये मामला एक जरूरतमंद के साथ सिस्टम के खिलवाड़ की इन्तेहा है. अब पश्चिम विहार के जिस इंद्रप्रस्थ ग्लोबल स्कूल ने इनको एडमिशन देने से मना किया एनडीटीवी इंडिया के रिपोर्टर वहां पहुंचे तो स्कूल का कहना है कि गलती स्कूल की नहीं शिक्षा निदेशालय की है क्योंकि स्कूल के अंदर वेकेंसी है ही नहीं और शिक्षा निदेशालय ने 5 बच्चों को यहां सीट अलॉट कर दी हैं.

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जबकि एनडीटीवी इंडिया के पास शिक्षा निदेशालय की हफ़्ते भर पहले की चिट्ठी है जिसमें निदेशालय स्कूल से बच्चे को दाखिला देकर दो दिन में रिपोर्ट देने को कह रहा है. एनडीटीवी इंडिया ने शिक्षा निदेशालय से संपर्क की कोशिश की लेकिन कोई अधिकारी नहीं मिला.

जानकार बताते हैं कि शिक्षा विभाग और स्कूलों के बीच पेरेंट्स यूं ही फुटबॉल की तरह इधर से उधर धक्के खाते हैं जिसके चलते बीते साल भी EWS कोटे की 50% सीटें खाली रह गई थीं और इस साल भी हालात अच्छे नहीं. शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के वकील खगेश झा के मुताबिक 'बीते साल करीब 18 हज़ार सीटें खाली रह गई थीं शिक्षा विभाग के निकम्मेपन के कारण. जबकि कुल सीटें EWS में 38 हज़ार हैं और जिस तरह के हालात बने हुए हैं इस साल आंकड़ा बढ़ सकता है.'


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