दिल्ली हिंसा : मोहिंदर सिंह ने बचाई थी मुस्लिम परिवारों की जान, अब इस तरह कर रहे हैं मदद

दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है. दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं. हिंसा प्रभावित इलाकों में अभी भी काफी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

दिल्ली हिंसा : मोहिंदर सिंह ने बचाई थी मुस्लिम परिवारों की जान, अब इस तरह कर रहे हैं मदद

दिल्ली हिंसा में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • दिल्ली हिंसा में अब तक 53 की मौत
  • मोहिंदर सिंह ने बचाई मुस्लिमों की जान
  • अब भरोसा जीतने की कर रहे हैं कोशिश
नई दिल्ली:

दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है. दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं. हिंसा प्रभावित इलाकों में अभी भी काफी संख्या में पुलिस बल तैनात है. पुलिस और प्रशासन हालात सामान्य करने की हर संभव कोशिश में जुटे हैं. पीड़ितों को अभी तक दो करोड़ से ज्यादा मुआवजा दिया जा चुका है. हिंसा के दौरान की तमाम कहानियां सामने आ रही हैं. ऐसी ही एक कहानी के हीरो हैं मोहिंदर सिंह और उनके बेटे, जो कुछ मुस्लिम परिवारों के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि मोहिंदर खुद 1984 दंगों का शिकार हुए थे.

दिल्ली के दंगों में कई ऐसे उदाहरण भी हैं, जब मुसलमानों ने हिन्दुओं को बचाया और हिन्दुओं ने मुस्लिम परिवारों की सुरक्षा की. ऐसे ही गोकुलपुरी के मोहिंदर सिंह ने 24 और 25 फरवरी को करीब 60 से 70 मुसलमानों को अपनी स्कूटी और मोटरसाइकिल से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. अब मोहिंदर सिंह इन मुस्लिम परिवारों में गोकुलपुरी दोबारा लौटने के विश्वास बहाली के काम में जुटे हैं.

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हिंसा के समय मोहिंदर सिंह और उनके बेटों ने पहले महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित जगह पहुंचाया. इसके बाद उन्होंने दंगाइयों की नजरों से बचाते हुए मुस्लिम पुरुषों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. सभी मुस्लिम परिवार उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे हैं. मोहिंदर सिंह अब इन परिवारों की वापसी को लेकर उनका भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही वह दोनों समुदायों के बीच गहरी हो चुकी खाई को पाटने की भी कोशिश कर रहे हैं. मोहिंदर सिंह जैसे लोगों के भरोसे दंगे के 13 दिन बाद फारुख और इश्हाक गोकुलपुरी में अपनी दुकान खोलने आए हैं.

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बताते चलें कि दिल्ली हिंसा के एक आरोपी शाहनवाज उर्फ शानू को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया है. शानू ने कथित तौर पर दिलबर नेगी नामक युवक के दोनों हाथ काट दिए थे और उसे जिंदा आग में फेंक दिया था. दिलबर शिव विहार इलाके में स्थित अनिल स्वीट हाउस में काम करते थे और उनका शव बुरी तरह जली हुई हालत में दुकान के अंदर ही बरामद हुआ था. चश्मदीदों ने पुलिस को बताया कि दंगाइयों को सबसे ज्यादा शाहनवाज ही भड़का रहा था.

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