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रिपोर्ट में खुलासा: डेंगू से मरने वाली 7 वर्षीय बच्‍ची के पिता को फोर्टिस अस्‍पताल ने दिया 700% का ज्‍यादा बिल

गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में सात वर्षीय आद्या सिंह की मौत के मामले में सरकार की जांच रिपोर्ट आने के बाद को हरियाणा के एक मंत्री ने "हत्या" बताया था. वहीं सरकार की जांच रिपोर्ट में आरोप लगे कि अस्‍पताल से बच्‍ची के पिता से ज्‍यादा पैसे वसूले और लापरवाही बरती. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अस्‍पताल ने बच्‍ची के पिता को 700 प्रतिशत ज्‍यादा का बिल दिया था. 

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रिपोर्ट में खुलासा: डेंगू से मरने वाली 7 वर्षीय बच्‍ची के पिता को फोर्टिस अस्‍पताल ने दिया 700% का ज्‍यादा बिल

डेंगू से मौत के बाद फोर्टिस अस्‍पताल ने आद्या के पिता को दिया 15 लाख रुपये का बिल (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. हरियाणा के एक मंत्री ने आद्या की मौत को "हत्या" बताया था
  2. अस्‍पताल ने आद्या के पिता को दिया था 15.5 लाख रुपये का बिल
  3. आद्या के पिता ने अस्‍पताल पर पैसे देकर खरीदने का भी लगाया है आरोप
गुड़गांव: गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में सात वर्षीय आद्या सिंह की मौत के मामले में सरकार की जांच रिपोर्ट आने के बाद को हरियाणा के एक मंत्री ने "हत्या" बताया था. वहीं सरकार की जांच रिपोर्ट में आरोप लगे कि अस्‍पताल से बच्‍ची के पिता से ज्‍यादा पैसे वसूले और लापरवाही बरती. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अस्‍पताल ने बच्‍ची के पिता को 700 प्रतिशत ज्‍यादा का बिल दिया था. 

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सितंबर में आद्या की मौत के बाद उसके परिवारवालों को 15.5 लाख रुपये का बिल देने वाले अस्‍पताल पर सरकार की जांच में कई अनियमितताएं पाई गई. वहीं आद्या के पिता ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया कैंपेन को खत्‍म करने और उन पर केस ना करने के एवज में अस्‍पताल ने उन्‍हें पैसे देने का ऑफर किया था. 

आद्या के पिता जयंत सिंह ने एनडीटीवी को बताया कि फोर्टिस अस्‍पताल के वरिष्‍ठ अधिकारी उनके घर पर आए थे. उन अधिकारियों ने अस्‍पताल को बिल के लिए दिए पूरे पैसे वापस करने के साथ 25 लाख रुपये अलग से देने का ऑफर दिया था. हालांकि अस्‍पताल ने जयंत सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है. 

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आद्या को 31 सितंबर को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था और 14 सितंबर को मौत हो गई थी. सरकार की 41 पन्‍नों की जांच रिपोर्ट में अस्‍पताल को लापरवाही, अनैतिक और गैरकानूनी कृत्यों का दोषी पाया है. इतना ही नहीं छोटी लड़की को दी गई दवाओं पर 108 प्रतिशत प्रॉफिट कमाया है. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्‍पताल ने जानबूझकर जेनेरिक और सस्ती दवाइयों की बजाय महंगी दवाओं का इस्तेमाल किया गया. अस्पताल ने बच्‍ची के परिवार से 717 प्रतिशत ज्‍यादा बिल दिया. 

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रिपोर्ट में कहा कि 'उपभोग्य पदार्थों का गलत उपयोग' इस्‍तेमाल किया गया जैसे सिरिंजों और दस्ताने का. इतना ही नहीं अलग-अलग ब्रांड की महंगी दवाइयों आद्या को दी गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अस्‍पताल ने नियमों का भी उल्लंघन किया. अस्पताल ने बुनियादी लाइफस्‍पोर्ट एम्बुलेंस प्रदान की जिसमें ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं की कमी थी. 

 


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