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पूर्वी दिल्ली में बन रहा कुतुब मीनार, दक्षिणी दिल्ली के कुतुब मीनार को दे रहा टक्कर!

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ इन दिनों कुतुब मीनार को टक्कर देता दिख रहा है. इस कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई करीब 65 मीटर तक पहुंच गई है, जबकि कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है.

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पूर्वी दिल्ली में बन रहा कुतुब मीनार, दक्षिणी दिल्ली के कुतुब मीनार को दे रहा टक्कर!

गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई करीब 65 मीटर तक पहुंच गई है.

नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के मेहरौली में 13वीं शताब्दी में बनी क़ुतुब मीनार के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन पूर्वी दिल्ली के ग़ाज़ीपुर में बन रही क़ुतुब मीनार को टक्कर देती 'कूड़ा मीनार' के बारे में क्या आप जानते हैं? पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ इन दिनों कुतुब मीनार को टक्कर देता दिख रहा है. इस कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई करीब 65 मीटर तक पहुंच गई है, जबकि कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है. यह हाल तब है जब नियमों के मुताबिक कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई 25 मीटर से ऊपर नहीं हो सकती.
 
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ठीक सालभर पहले 1 सितंबर 2017 को ये कूड़े का पहाड़ भरभरा कर गिर पड़ा, जिसमे दो लोगों की मौत हुई, 5 घायल हो गए. पूर्वी नगर निगम की जांच में पाया गया कि लगातार बरसात की वजह से नमी बनी और गैस निकलने की जगह नहीं मिलने के चलते विस्फोट हुआ, जिसमें कूड़े के पहाड़ का हिस्सा नहर नाला और सड़क पर आ गया, लेकिन बहुत हैरानी की बात है इसमें कोई अफ़सर या व्यक्ति दोषी नहीं पाया गया है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर बिपिन बिहारी सिंह ने बताया कि 'जांच रिपोर्ट आ गई है लेकिन उसमे कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया गया है, क्योंकि ये सब एक सिस्टम के तहत होता है. ऐसे में किसी व्यक्ति पर दोष मढ़ना ठीक नहीं. ये एक अनहोनी थी और दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. हालांकि हमने कोशिश की है भविष्य में ऐसे घटनाएं ना हो इसको लेकर सतर्क रहें.'

सवाल उठने लाज़मी है कि कूड़े का पहाड़ गिरना नगर निगम की लापरवाही ना माना जाए तो क्या कुदरत का कहर माना जाए? लेकिन इस हादसे के बाद भी सालभर बाद भी हालात नहीं बदले हैं. सालभर पहले हुए हादसे के बाद एलजी ने कूड़ा ग़ाज़ीपुर की जगह बाहरी दिल्ली के रानीखेड़ा में डालने का फैसला किया. लेकिन रानीखेड़ा के आसपास के लोगों ने आंदोलन किया तो कूड़ा फिर से ग़ाज़ीपुर में डालना शुरू हो गया. 

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2017 के सितंबर में एलजी अनिल बैजल ने कहा NHAI नवंबर 2017 से सड़क बनाने के लिए ग़ाज़ीपुर का कूड़ा उठवाना शुरू करेगा, लेकिन आज तक एक तिनका नहीं उठा. आखिरकार डीडीए ने पूर्वी दिल्ली का कूड़ा ग़ाज़ीपुर की जगह घोंडा गुजरान और सोनिया विहार में यमुना किनारे डालने के लिए लैंडफिल साइट निर्धारित की, लेकिन दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी का संसदीय क्षेत्र होने के चलते इस पर ब्रेक लग गया. तबसे आजतक भी यहां कूड़ा डालना जारी है. जिस रोड पर कूड़ा गिरने से हादसा हुआ वो रोड तबसे लेकर आज तक बंद है. हालांकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम का कहना है कि उसने इस भावी कुतब मीनार में नालों से निकलने वाली गाद डालना बंद किया है, जिससे यहां डालने वाले कूड़े की मात्रा में कमी आई है. ढलाव घर मे कॉम्पैक्टर लगाकर कूड़ा का आकार घटाने और कूड़े से गैस, पानी बिजली बनाने की योजना पर काम चल रहा है.

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आपको बता दें कि पूर्वी दिल्ली का सारा कूड़ा ग़ाज़ीपुर लैंडफिल साइट पर आता है. रोज़ाना लगभग 2600 टन कूड़ा. जिसमें से 1000 टन का ही निस्तारण हो पाता है और 1600 टन ग़ाज़ीपुर के पहाड़ में योगदान देता है, जिससे ग़ाज़ीपुर में आज करीब 150 लाख टन कूड़ा जमा हो गया है और यही हाल रहा तो ये 'कूड़ा मीनार' ऊंचाई में जल्द ही क़ुतुब मीनार को पीछे छोड़ देगी. याद रहे कि कूड़ा रूपी क़ुतुब मीनार सुप्रीम कोर्ट तक के सब्र का बांध कुछ इस कदर तोड़ चुका है कि सुप्रीम कोर्ट को उपराज्यपाल को फटकारते हुए कहना पड़ा कि आप खुद को सुपरमैन समझते हैं, लेकिन करते कुछ नहीं.


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