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सरकार के इस फैसले से दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में बढ़ जाएगा फीस का बोझ

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से प्राइवेट स्कूलों की फीस सातवें आसमान पर पहुंच जाएगी, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के बंगले के सामने सैकड़ों अभिभावकों ने प्रदर्शन किया

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सरकार के इस फैसले से दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में बढ़ जाएगा फीस का बोझ

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. सातवें वेतन आयोग के मुताबिक वेतन देने का विरोध कर रहे स्कूल
  2. जब दिल्ली के स्कूलों के पास पैसा सरप्लस है तो फीस बढ़ोत्तरी क्यों?
  3. आयोग की सिफारिशों के मुताबिक शिक्षकों को नहीं मिलता वेतन
नई दिल्ली: दिल्ली में प्राइवेट स्कूल एक बार फिर फीस बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. हाल में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर स्कूलों को सातवां वेतन आयोग लागू करने के निर्देश दिए हैं. इस नोटिफिकेशन के बाद बहुत सारे स्कूलों ने तो फीस में दो सौ से लेकर दो हजार तक की बढ़ोत्तरी भी कर दी है. इसके खिलाफ विद्यार्थियों के अभिभावकों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के बंगले के सामने शुक्रवार को सैकड़ों अभिभावकों ने प्रदर्शन किया. सांकेतिक तौर पर किसी के हाथ में थाली थी तो कोई सीटी बजाकर सरकार पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा था. अभिभावकों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से प्राइवेट स्कूलों की फीस सातवें आसमान पर पहुंच जाएगी.

द्वारका निवासी अभिभावक अपराजिता ने कहा कि ''यह गलतफहमी है कि फीस नहीं बढ़ रही है. सारे स्कूल फीस बढ़ा रहे हैं. जब आप कह रहे थे कि स्कूलों के पास फंड है तो किस सीए के कहने से आपने फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी.''

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फीस बढ़ाने के विरोध प्रदर्शन में शिक्षक अनीता वशिष्ठ भी शामिल हुईं. उनका कहना है कि वेतन आयोग के नाम पर स्कूल फीस बढ़ा देते हैं लेकिन शिक्षकों को कम ही पैसा मिलता है. अनीता वशिष्ठ ने कहा कि छठे वेतन आयोग की सिफारिश के मुताबिक भी हमें तनख्वाह नहीं मिल रही है तो सातवां वेतन आयोग क्या बढ़ाएगा. स्कूल पेरेंट्स से पैसे ले लेती है लेकिन हमें कुछ नहीं मिलता है.''

उधर प्राइवेट स्कूल भी सातवें वेतन आयोग के मुताबिक शिक्षकों को वेतन देने का विरोध कर रहे हैं. प्राइवेट स्कूलों का कहना है कि सरकार एक तरफ फीस नहीं बढ़ाने का स्कूलों पर दबाव डालती है दूसरी तरफ सातवां वेतन आयोग लागू करने की मांग कर रही है.

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दिल्ली प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण यह सारा मामला उछला है. छह-सात स्कूलों को छोड़कर बाकी लोग नहीं चाहते हैं कि सातवां वेतन आयोग लागू हो.

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फीस बढोत्तरी के मामले पर कोर्ट ने भी अनिल देव कमेटी की सिफारिश के आधार पर ऑडिट करवाया था, जिसमें कहा गया कि दिल्ली के करीब 11 हजार प्राइवेट स्कूलों का पांच सौ करोड़ रुपये सरप्लस है. जब पैसा सरप्लस है तो फीस बढ़ोत्तरी क्यों? हाईकोर्ट के वकील खागेश झा ने कहा कि नोटिफिकेशन निकालकर पंद्रह फीसदी और बढ़ा दो, जबकि पांच सौ करोड़ रुपए सरप्लस है.


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