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ग्रेटर नोएडा : 'गृह प्रवेश' के तीन दिन बाद ही ढह गया आशियाना

शिव त्रिवेदी के सपनों के घर को सजाने के लिए उनकी साली अपने एक वर्षीय बच्चे के साथ रुक गईं थीं, परिजन मलबे में तलाश रहे जीवन की आशा

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ग्रेटर नोएडा : 'गृह प्रवेश' के तीन दिन बाद ही ढह गया आशियाना

ग्रेटर नोएडा में राशायी हुए भवनों का मलबा हटाया जा रहा है.

खास बातें

  1. शिव ने दिल्ली आने के तीन सालों के अंदर बीते मार्च में घर खरीदा था
  2. नोएडा की एक कंपनी में शाखा प्रबंधक शिव यूपी के मैनपुरी के निवासी
  3. शिव ने अपने दफ्तर में आखिरी बार मंगलवार को रात 8.50 बजे बात की थी
नई दिल्ली:

ग्रेटर नोएडा में मंगलवार की रात में धराशायी हुई इमारत में हाल ही में अपनी मां के साथ रहने आए 25 साल के शिव त्रिवेदी ने इसी सप्ताहांत में गृह प्रवेश की पूजा आयोजित की थी. उनके सपनों के घर को सजाने के लिए उनकी साली अपने एक वर्षीय बच्चे के साथ यहीं रुक गईं थीं. बुधवार को वे सभी एक बहुमंजिला इमारत के उनकी इमारत के ऊपर ढहने से उसके मलबे में फंसे थे. उनके जीवित रहने की संभावना नहीं है. 

मौके पर दर्जनों बचाव कर्मी मलबे को हटाने के लिए क्रेनों और बुलडोजरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. दूर रोते हुए खड़े त्रिवेदी परिवार के सदस्य मलबे में फंसे चारों लोगों के जीवन की प्रार्थना कर रहे थे. नोएडा की एक कंपनी में शाखा प्रबंधक शिव उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में रह रहे अपने माता-पिता के दो बेटों में छोटे हैं. तीन साल पहले बेहतर जीवन की तलाश में वे नोएडा में रहने लगे थे. 

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शिव त्रिवेदी के पिता ने कहा कि शिव परिवार के लिए आशा की किरण हैं और हमेशा से ही होनहार रहे हैं. शिव ने दिल्ली आने के मात्र तीन सालों के अंदर इसी मार्च में ये घर खरीदा था. शिव के एक चाचा ने बताया, "उसने काफी कम उम्र में बहुत कुछ हासिल कर लिया था. मेरी आयु 50 है और मैं अपने परिवार के लिए घर नहीं खरीद सकता. लेकिन उसने मात्र 25 वर्ष की आयु में घर खरीद लिया."

शिव ने अपने कार्यालय में आखिरी बार मंगलवार को रात लगभग 8.50 बजे बात की थी. लेकिन उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो सका क्योंकि वे इस हादसे के शिकार हो गए. उनकी इमारत दिल्ली के व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है. शिव के पिता, बड़े भाई, दो चाचा, चचेरे भाई और अन्य करीबी रिश्तेदार बुधवार सुबह तक घटनास्थल पर पहुंच गए थे. 

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शिव के 27 वर्षीय भाई राम त्रिवेदी ने बताया, "मुझे विश्वास है कि वे मलबे में हैं और उनके जीवित होने का भी पूर्ण विश्वास है लेकिन उन्हें जल्दी निकाले जाने की जरूरत है." पेशे से वकील राम ने कहा कि शिव ने शनिवार को गृह प्रवेश पूजा का आयोजन किया था जिसके बाद शिव की मां, साली और उनकी एक वर्षीय बेटी को छोड़कर लगभग सभी लोग मैनपुरी चले गए थे. ये लोग नए घर में कुछ दिन उनके साथ रहने और घर को व्यवस्थित करने के लिए यहीं रुक गए थे. विचलित राम ने बैठने से मना कर दिया, इस दौरान वे मुट्ठी बांधे लगातार मलबे की तरफ देख रहे थे. 

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VIDEO : दो इमारतें धूल में मिल गईं

शिव के परिजनों ने आरोप लगाया कि इमारत के निर्माण में बिल्डर ने घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया था. उन्होंने बचाव अभियान के देर से शुरू होने की भी शिकायत की, जिससे इमारत में फंसे हुए लोगों के जीवित बचने की उम्मीद कम हो गई है. शिव के एक रिश्तेदार ने क्षेत्र में नियमों में ढिलाई का आरोप लगाते हुए कहा, "इतना समय हो गया है और हमारे परिवार का अभी तक कोई पता नहीं लगा है. उन्होंने अगर रात में ही बचाव अभियान शुरू किया होता तो मेरे परिवार को बचाया जा सकता था."
(इनपुट आईएएनएस से)



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