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ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली का 'उड़ता पंजाब' जहां के 80 प्रतिशत बच्चे हैं ड्रग्स के शिकार

इस सर्वे के दौरान 1414 लोगों का इंटरव्यू किया गया जिसमें से 1012 लोग नई सीमापुरी के थे जबकि 402 पुरानी सीमापुरी के. इंटरव्यू देने वाले में ज्यादा से ज्यादा युवा और बच्चे शामिल थे.  

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ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली का 'उड़ता पंजाब' जहां के 80 प्रतिशत बच्चे हैं ड्रग्स के शिकार

दिल्ली का उड़ता पंजाब जैसा एक इलाका जहां के बच्चे हो गए ड्रग्स का शिकार. (प्रतीकात्मक फोटो)

खास बातें

  1. दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बच्चे गलत संगत में हो रहे ड्रग्स के शिकार
  2. ड्रग्स के चलते कर रहे सामान की चोरी
  3. ड्रग्स बना महिलाओं के लिए सरदर्द का कारण.
नई दिल्ली: भारत में जब ड्रग्स की बात होती है तो सबसे पहले पंजाब का नाम लिया जाता है. युवा के द्वारा ड्रग्स के सेवन को लेकर पंजाब  हमेशा सुर्खियों में रहा है. नेता, राजनेता और अभिनेता सब पंजाब में हो रहे ड्रग्स के सेवन को लेकर गंभीर नज़र आते हैं. चुनाव के दौरान ड्रग्स चुनावी मुद्दा बन जाता है तो ड्रग्स को लेकर 'उड़ता पंजाब' जैसी फिल्म भी बन चुकी है. लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे की दिल्ली में एक 'उड़ता पंजाब' जैसा इलाका है जहां पर बच्चे ड्रग्स का शिकार हैं. पहली नज़र में इस बात पर यकीन करना मुश्किल है लेकिन यह सच है.

यह बात तब खुलकर सामने आई जब 'सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ़ यूथ एंड मासेस' ने इस इलाके में एक सर्वे किया.  इस सर्वे के दौरान 1414 लोगों का इंटरव्यू किया गया जिसमें से 1012 लोग नई सीमापुरी के थे जबकि 402 पुरानी सीमापुरी के. इंटरव्यू देने वाले में ज्यादा से ज्यादा युवा और बच्चे शामिल थे.  करीब 120 दिनों तक चले इस सर्वे में 9 टीम का गठन किया गया था. इस सर्वे में जो नतीजे आये वह चौकने वाले हैं. 

सर्वे में हुआ यह खुलासा 
इस सर्वे में पता चला कि सीमापुरी के करीब 80 प्रतिशत बच्चे ड्रग्स के आदि हो चुके हैं जिनकी उम्र 7 साल तक की है.  इस सर्वे में नशा करने वाले से कई सवाल पूछे गए. सबसे ज्यादा बच्चों ने कहा कि वह अपने दोस्तों की संगत में आकर ड्रग्स लेते हैं. सर्वे में यह पाया गया कि अगर नई और पुरानी सीमापुरी को मिलाकर औसत निकाला जाए तो करीब 49 प्रतिशत बच्चे अपने दोस्त के संगत में इस लत के शिकार हो गए. पुरानी सीमापुरी के 60.19 प्रतिशत बच्चे ऐसा कर रहे हैं जबकि नई सीमापुरी में इसका प्रतिशत 37.45 है. सर्वे में पता चला कि जो बच्चे नशे का सेवन करते हैं उनके परिवार के कुछ सदस्य भी नशे के आदि हैं. पुरानी सीमापुरी के 8.7 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि आसानी से ड्रग मिल जाता है जिसकी वजह से बच्चे नशे शिकार बनते जा रहे हैं. जबकि नई सीमापुरी में 12.64 प्रतिशत बच्चों ने ऐसा कहा. जब लोगों की यह राय जानने की कोशिश की गई कि क्या उपचार के द्वारा उनकी इस  आदत को ठीक किया जा सकता है तो करीब 70 प्रतिशत बच्चों ने हां में जवाब दिया. यानी बच्चे यह सोचते हैं कि अगर सही सलाह और सही ट्रीटमेंट मिले तो वह इस आदत से अपने आपको मुक्त कराना चाहते हैं.

एनडीटीवी की पड़ताल 
सर्वे के द्वारा की गई बात के बारे में पता लगाने के लिए हम नई सीमापुरी पहुंचे. सबसे पहले हम एक पार्क में पहुंचे.  इस पार्क में कई बच्चे खेलते हुए नज़र आये. साथ में कुछ युवा भी पार्क में बैठे हुए दिखाई दिए. अचानक ड्रग्स के बारे में पूछना हमारे लिए मुश्किल था.  फिर धीरे-धीरे हम युवा और बच्चों से बात करने लगे. उम्मीद से ज्यादा लोगों से जवाब मिला.  लोगों ने खुलकर ड्रग्स के बारे में बात की. सबसे बड़ी बात यह थी कि कैमरे के सामने भी बच्चे और युवा ड्रग्स के बारे में बात करने के लिए तैयार हो गए. एक बच्चे ने कहा कि कैसे वह दोस्त की संगत में ड्रग लेने लगा.और अब वो अपने गांव वापस चला जाना चाहता है. इस बच्चे से देर तक बात हुई और इंटरव्यू में उसने कई बातों का खुलासा किया. सच है या नहीं यह पता लगाने के लिए हम पहुंचे। 

पार्क में मौजूद कई युवाओं ने कहा कि वे सब ड्रग्स ले रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि ड्रग्स आसानी से मिल जाती है. पार्क के बाद हम सीमापुरी के अंदर गए. एक दुकान के पास कुछ लोग मिल गए जो ड्रग्स के साथ-साथ जीएसटी को लेकर भी परेशान नज़र आये.  एक महिला ने बताया कि जीएससटी की वजह से अब उनके कबाड़ का दाम कम हो गया है और नुकसान हो रहा है. इस भीड़ में शामिल एक महिला ने बताया कि उसके दस साल के बच्चे ने मीठा सुपारी खाना शुरू कर दिया है. यह बच्चा घर का सामान बेच देता है और जो पैसा मिलता है उससे जुआ खेलता है. इस महिला का पति नहीं है. बैटरी रिक्शा चला कर अपना गुजारा कर रही है. अब इस महिला को डर लगने लगा है कि आगे जाकर उसका बेटा कहीं ड्रग्स लेना न शुरू कर दे. 

सड़क किनारे ड्रग्स इंजेक्शन लेते हुए पकड़े गए कुछ लोग 
हम आगे बढ़ते गए. थोड़ी आगे जाने के बाद दिखाई दिया कि सड़क के किनारे के कुछ लोग नशा कर रहे हैं. जब हम उनके आसपास पहुंचे तो वे कैमरा देखकर भाग गए. उनमें से एक आदमी को हमने रोक लिया. इस आदमी के एक हाथ में सीरींज थी और दूसरे हाथ ड्रग्स की शीशी. जब हमने उससे पूछताछ करनी शुरू की तो आदमी ने बताया कि वह ड्रग्स ले रहा था. इस आदमी ने बताया कि वह दस सालों से ड्रग्स ले रहा है. कबाड़ बीनकर रोज 300-400 रुपया कमा तो लेता है लेकिन यह सभी पैसे ड्रग्स लेने में खर्च हो जाते हैं.  इस आदमी के पास खड़े एक और आदमी से बात हुई जिसका कहना था कि वह भी नशे का आदि है और जितना पैसा कमाता है उससे वह ड्रग्स खरीदता है. शादीशुदा भी है लेकिन परिवार अलग रहता है. अलग होने की वजह भी ड्रग्स है. 

इस तरह कई लोग यहां मिले जिनका कहना था कई सालों से वह लोग ड्रग्स ले रहे हैं, छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन छोड़ नहीं पा रहे हैं. उनको कोई सही रास्ता भी नहीं दिखा रहा है. 

महिलाओं की शिकायतें 
इस तरह लोगों की शिकायतें बढ़ती गईं.  जो भी मिलता है वह ड्रग्स को लेकर परेशान नज़र आ रहा  था. एक 70 साल की महिला ने बताया कि उसके दोनों बेटे ड्रग्स के शिकार हैं.  कोई काम नहीं करते हैं. ड्रग्स खरीदने के लिए घर के बर्तन बेच देते हैं. एक और महिला ने बताया कि उसकी पति ड्रग्स लेता है और ड्रग्स की ही वजह से बड़ा बेटे का देहांत हो चुका है. बेटा शादीशुदा था और दो बच्चे भी हैं. अब ये बच्चे अपने मामा के घर रह रहे हैं. एक महिला ने बताया कि उसने अपने पति को ठीक करने के लिए किसी एनजीओ में भेजा था. 15000 रुपये खर्च भी किए लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. अभी भी उसका पति नशा करता है.  इस तरह और कई लोग मिल गए जो अपनी-अपनी कहानी बताते चले गए. एक 16 साल का लड़का मिला जिसका कहना था कि अपने दोस्त के चक्कर उसने नशा करना शुरू किया, अब वह छोड़ नहीं पा रहा है. लोगों को मौत का खौफ भी डराने लगा है, लेकिन वे नशा करना छोड़ नहीं पा रहे हैं. एक 28 साल के युवा ने खुद आकर हमसे बात की. अब वह नशा छोड़ नहीं पा रहा है. दो शादी की है और बच्चे भी हैं. अब उसे यह लगने लगा है कि नशे की वजह से वह अब ज्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहने वाला है. 

सीमापुरी में नशा और नशे का कारोबार अपनी सीमा पार कर चुका है. कबाड़ ने इन लोगों की ज़िंदगी को कचरा बना दिया है. कबाड़ बीनकर ये लोग पैसे तो कमा लेते हैं लेकिन इस पैसे से ड्रग्स खरीदकर नशा करते हैं. अगर समय रहते इन सबको रोकने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो आगे यह भी हो सकता है कि 100 प्रतिशत बच्चे ड्रग्स की चपेट में आ जाएं.


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