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खंडहर में बदल रहा इतिहास : दिल्ली के जौंती गांव की मुगलकालीन धरोहरें अब सिर्फ नाम की बचीं

दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर स्थित जौंती गांव 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां की इमारतें खंडहर में बदलती जा रही है

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खंडहर में बदल रहा इतिहास : दिल्ली के जौंती गांव की मुगलकालीन धरोहरें अब सिर्फ नाम  की बचीं

दो साल पहले इस गांव को आदर्श गांव घोषित किया गया है.

खास बातें

  1. दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित है ऐतिहासिक जौंती गांव
  2. 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है यह गांव
  3. इसी गांव से हरित क्रांति की शुरुआत भी हुई थी
नई दिल्ली:

दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर स्थित जौंती गांव 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां की इमारतें खंडहर में बदलती जा रही है. मुगलकालीन धरोहरों के लिए मशहूर इस गांव की ऐतिहासिक धरोहरों में अब गाय और भैंस बांधे जाते हैं. वहीं, बहुत सारी इमारतों को लोगों ने कब्जा करके अपने मकान में तब्दील कर लिया है. इसी गांव से सबसे पहले हरित क्रांति की भी शुरुआत हुई थी. हरित क्रांति के दफ्तर में अब डिस्पेंसरी है. दो साल पहले इस गांव को आदर्श गांव घोषित किया गया है.

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सरकार की योजना इस गांव को ग्रामीण पर्यटन स्थल के दौर पर स्थापित करने की है, लेकिन देखना होगा कि कब तक कामयाबी मिलती है. फिलहाल यह गांव अपनी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखने की लड़ाई लड़ रहा है. गांव के बीच एक मुगलकालीन कुआं भी है, जिसमें अब भी पानी मौजूद है. गांव के दूसरे सभी पुराने कूएं सूख गए, लेकिन मुगलकालीन कुएं में पानी मौजूद है. 


जौंती गांव RWA के महासचिव बलजीत सिंह ने कहा कि गांव के ऐतिहासिक इमरतों के सरंक्षण की बात कई बार कही गई, लेकिन योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई. उन्होंने बताया कि हरित क्रांति के जनक एम एस स्वामीनाथन खुद यहां आते थे और लोगों को फसलों की बीज देते थे. बाद में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से भी किसान बीच लेने के लिए यहां आते थे, लेकिन अब उस जगह पर डिस्पेंसरी चलाई जाती है, जहां स्वामीनाथन बैठते थे. 
 



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