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भारतीय उद्योगों ने कार्बन उत्सर्जन 2 फीसदी कम किया : ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी

ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ने एक बयान में कहा कि पीएटी क्रियान्वयन के पहले चरण में एल्युमिनीयम, सीमेंट, कोर-अल्कली, उर्वरक, आयरन और स्टील, पल्प एवं पेपर, कपड़ा और तापीय ऊर्जा संयंत्र जैसे ऊर्जा आधारित क्षेत्रों से 478 नामांकित उद्योगों (डीसी) को कवर किया गया.

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भारतीय उद्योगों ने कार्बन उत्सर्जन 2 फीसदी कम किया : ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी द्वारा 2012 और 2015 के बीच परफॉर्म, अचीव और ट्रेड (पीएटी) स्कीम के पहले चरण के क्रियान्वयन के दौरान 400 से अधिक उद्योगों ने अपना कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन करीब 3.1 करोड़ टन कम किया जो वार्षिक उत्सर्जन का करीब 2 फीसदी है. ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ने एक बयान में कहा कि पीएटी क्रियान्वयन के पहले चरण में एल्युमिनीयम, सीमेंट, कोर-अल्कली, उर्वरक, आयरन और स्टील, पल्प एवं पेपर, कपड़ा और तापीय ऊर्जा संयंत्र जैसे ऊर्जा आधारित क्षेत्रों से 478 नामांकित उद्योगों (डीसी) को कवर किया गया.

एक साथ इन क्षेत्रों की भारत के प्राथमिक ऊर्जा उपभोग में 33 फीसदी हिस्सेदारी है. इस योजना के परिणामस्वरूप 86.7 लाख टन तेल के बराबर ऊर्जा की बचत हुई है जो 68.6 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है. इसके परिणामस्वरूप 5,635 मेगावाट बिजली के उत्पादन से भी बचा जा सका जिसकी वजह से 37,685 करोड़ रुपये की आर्थिक बचत हुई. इसके साथ ही ऊर्जा उपभोग में कमी के कारण 9,500 करोड़ रुपये बचाए गए.

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पीएटी नेशनल मिशन ऑफ इनहैंस्ड एनर्जी एफिशिएंसी (एनएमईईई) के अंतर्गत शुरू किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रयासों में से एक है जो 2012 में नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज के अंतर्गत शुरू किया गया मिशन है. 

पीएटी योजना के अंतर्गत दक्षता के मौजूदा स्तर का विश्लेषण करने के लिए उद्योग के आधारहीन ऊर्जा खपत को सत्यापित करने के लिहाज से एक एनर्जी ऑडिट की जाती है और इसके बाद अलग-अलग इकाइयों को अलग-अलग लक्ष्य दिए जाते हैं. नामांकित उद्योगों के तौर पर जाने-जाने वाले इन बड़े ऊर्जा आधारित उद्योगों को विशेष प्रकार के ऊर्जा उपभोग में कमी लाने के लक्ष्य तीन वर्षो के लिए दिए जाते हैं. ये लक्ष्य औद्योगिकी इकाई की दक्षता के मौजूदा स्तर के आधार पर तय किए जाते हैं.

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प्रति यूनिट उत्पादन में अधिक ऊर्जा की खपत करने वाले उद्योगों को उनके ऊर्जा दक्ष प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले ऊंचे लक्ष्य दिए जाते हैं. इससे कुल बिजली बचत को बढ़ावा मिलता है क्योंकि कंपनियां एक दूसरे से मुकाबला करने के बजाए अपने प्रदर्शन को बेहतर करने की कोशिश करती हैं. पीएटी3 को 1 अप्रैल, 2017 को तीन वर्षों की अवधि के लिए अधिसूचित किया गया है. 116 नई इकाइयों को शामिल किया गया और 1.06 एमटीओई की कमी का लक्ष्य दिया गया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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