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भूगर्भीय हलचल और आपदा संबंधी वृहद मानचित्र तैयार कर रहा है जामिया विश्वविद्यालय

हिमालय क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप के लिए संवेदनशील माना जाता है.

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भूगर्भीय हलचल और आपदा संबंधी वृहद मानचित्र तैयार कर रहा है जामिया विश्वविद्यालय

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्ली: चंडीगढ़, शिमला और दिल्ली समेत देश के 29 शहरों के भूंकप की दृष्टि से संवेदनशील होने की रिपोर्ट के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया ऋषिकेश, जोशीमठ, गढ़वाल समेत विभिन्न क्षेत्रों को शामिल करते हुए भूगर्भीय हलचल और आपदा संबंधी वृहद 'मानचित्र' तैयार कर रहा है. जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय में आपदा प्रबंधन विभाग खोला गया. इसके तहत बीएससी, एमएससी और डॉक्‍टरेट की पढ़ाई को आगे बढ़ाया गया था. ऋषिकेश, जोशीमठ, गढ़वाल समेत विभिन्न क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक कॉरीडोर तैयार कर रहे हैं और इनके माध्यम से भूगर्भीय हलचल और आपदा संबंधी वृहद 'मानचित्र' तैयार किया जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि देश का कोई भी विश्वविद्यालय इस नक्शे और इसमें प्रदान की गई जानकारी को प्राप्त कर सकता है. विज्ञान और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में जामिया का यह महत्वपूर्ण योगदान होगा. भूगर्भ विज्ञानी प्रो. तलत ने कहा कि इस पद (कुलपति के) पर होते हुए भी वे मूल रूप से शिक्षक हैं और भूगर्भीय क्षेत्र में पीएचडी छात्रों का आज भी मागर्दशन करते हैं. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि चंडीगढ़, शिमला और दिल्ली समेत देश के 29 शहर भूंकप की दृष्टि से संवेदनशील हैं और भूकंप संभाव्य क्षेत्र हैं.

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सबसे संवेदनशील क्षेत्र
इन जगहों में से ज्यादातर हिमालय क्षेत्र की हैं. मालूम हो कि हिमालय क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप के लिए संवेदनशील माना जाता है. इसके अनुसार, दिल्ली सहित पटना, श्रीनगर, कोहिमा, पुडुचेरी, गुवाहाटी, गंगटोक, शिमला, देहरादून, इंफाल, और चंडीगढ़ भूकंपीय जोन चार और पांच के अंतर्गत आते हैं. इन शहरों में कुल तीन करोड़ से अधिक आबादी रहती है.

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एनसीएस के निदेशक विनीत गौहलात ने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भूकंप के रिकॉर्ड, टेक्टोनिक गतिविधियों और क्षति को ध्यान में रखते हुए, देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोन द्वितीय से पांचवें में वर्गीकृत किया है. प्रो. तलत ने कहा कि उत्तर भारत भूकंप के लिहाज से उच्च संवेदी क्षेत्र में आता है. ऐसे में इसके लिये होशियारी से शहरी योजना बनाये जाने की जरूरत है. दिल्ली खास तौर से भूकंप के संवेदनशील क्षेत्रों में आता है और रिक्टर पैमाने पर 6 से अधिक तीव्रता का भूकंप आने पर राष्ट्रीय राजधानी में भारी तबाही हो सकती है.

इसके कारण समस्या और भी जटिल तब हो जाती है जब दिल्ली के अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहां गलियां काफी संकरी है और आपदा आने के बाद बचाव एवं राहत कार्य में काफी कठिनाई आ सकती है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 29 शहर और कस्बे भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील हैं. इनमें दिल्ली और 9 राज्यों की राजधानी भी शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये शहर और कस्बे गंभीर से बहुत गंभीर भूकंपीय क्षेत्रों में आते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन 29 जगहों में से ज्यादातर हिमालय में हैं, जो भूकंप के लिहाज से दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय क्षेत्र हैं.

जोन चार और पांच क्रमश: गंभीर से बहुत गंभीर श्रेणियों के तहत आते हैं. जोन पांच में पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र आता है जिसमें जम्मू और कश्मीर के हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात के कच्छ का रण, उत्तर बिहार के कुछ हिस्से और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह शामिल हैं. दिल्ली के साथ जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, सिक्किम, उत्तरी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से जोन चार के तहत आते हैं. भुज, चंडीगढ़, अंबाला, अमृतसर, लुधियाना और रुड़की जोन चार और पांच के तहत आते हैं.

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इनपुट: भाषा

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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