Lockdown: दिल्ली एनसीआर के लाखों मजदूरों को उनके घर पहुंचाना बड़ी चुनौती, पुलिस लिस्ट बनाने में जुटी

Lockdown: दिल्ली पुलिस के कर्मी अलग-अलग इलाकों में जाकर घर वापस जाने वाले मजदूरों के नाम, पते और मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे

Lockdown: दिल्ली एनसीआर के लाखों मजदूरों को उनके घर पहुंचाना बड़ी चुनौती, पुलिस लिस्ट बनाने में जुटी

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

Lockdown: लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. पुलिस खुद ही अलग-अलग इलाकों में जाकर घर वापस जाने वाले मजदूरों के नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज कर रही है. दिल्ली सरकार ने भी नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं. लेकिन दिल्ली एनसीआर के लाखों मजदूरों को उनके घर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है.

बिहार के समस्तीपुर के रमेश यादव को करीब डेढ़ महीने बाद पहली बार उम्मीद बंधी है कि वे दिल्ली से वापस अपने घर बिहार लौट पाएंगे. पेशे से ड्राइवर रमेश की सारी गृहस्थी एक ट्रक में रखी है. तनख्वाह मिली नहीं है, लिहाजा सब भगवान भरोसे ही है. रमेश यादव बीते डेढ़ महीने से एक ट्रक में रहते हैं और चूरा और चीनी खाकर गुजारा कर रहे हैं, क्योंकि वे तीन किमी दूर जाकर खाने की लंबी लाइन में लग नहीं सकते हैं. रमेश यादव कहते हैं कि ''गांव जाकर क्या करेंगे! यहां क्या करेंगे सर, सुरक्षित तो रहेंगे अपने गांव में. कुछ खाने को तो मिलेगा. यहां रहे तो भूखे मर जाएंगे.''

रमेश यादव जैसे करीब दस हजार मजदूर मायापुरी इंडस्ट्रियल एरिया में काम करते हैं. बीते दो दिन से मायापुरी पुलिस थाने के लोग यहीं आकर अपने गांव लौटने वालों के नाम और पते दर्ज कर रहे हैं. दो दिनों में अब तक डेढ़ हजार से ज्यादा लोग अपना नाम बिहार-यूपी जाने वालों की लिस्ट में लिखवा चुके हैं. भीड़ लगाने पर सख्त पाबंदी है लिहाजा कई लोग खुद ही लिस्ट बनाकर पुलिस के पास जाकर नाम दर्ज करवा रहे हैं.

दिल्ली सरकार मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए अन्य राज्य सरकारों के संपर्क में है. नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है. दिल्ली सरकार घर लौटने वाले मजदूरों को मेडीकल और स्क्रीनिंग की सुविधा देने को भी तैयार है. लेकिन विशेष ट्रेनों और बसों के लिए राज्यों को खुद ही मंत्रालय से अनुरोध करना पड़ेगा तभी ये मजदूर जा सकेंगे. दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि ''हम राज्यों के टच में हैं. हम लॉजिस्टिक भी मुहैया करा सकते हैं लेकिन ट्रेन के लिए खुद रेल मंत्रालय से संपर्क करना पड़ेगा.''

फिलहाल पुलिस खुद ही घर वापस लौटने वाले मजदूरों के नाम, पते उनके इलाकों में जाकर दर्ज कर रही है. लेकिन अभी तक कितने मजदूर हैं और कितने उनके परिवार के लोग हैं, इसका ठीक आंकड़ा न तो राज्य सरकार के पास है और न ही केंद्र के पास. इसी के चलते कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरों के बीच इन लाखों मजदूरों की घर वापसी इतनी आसान नहीं है.

 
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