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राजनीतिक सहमति के बाद ही लोकसभा-विधानसभा का चुनाव कराना संभव : चुनाव आयोग

मुख्य चुनाव आयुक्त ने हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को चुनाव कराने का एलान किया.

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राजनीतिक सहमति के बाद ही लोकसभा-विधानसभा का चुनाव कराना संभव : चुनाव आयोग

(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ए के जोती जब चुनाव आयुक्तों के साथ मीडिया के सामने आए तो सबको उम्मीद थी कि वो हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ गुजरात में भी विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान करेंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त ने हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को चुनाव कराने का एलान किया. 18 दिसंबर को वोटों की गिनती कराने की घोषणा की लेकिन गुजरात में चुनाव कराने के बारे में औपचारिक एलान नहीं किया. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि गुजरात सरकार ने औपचारिक तौर पर गुज़ारिश की है कि राज्य में सात ज़िलों में बाढ़ की वजह से वहां राहत-पुनर्वास का काम जारी है, सड़कों को काफी नुकसान हुआ है इसलिए वहां मोडल कोड आफ कंन्डक्ट लागू करने से प्रभावित लोगों के लिए जारी राहत और बचाव कार्यों पर असर पड़ेगा.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने दलील दी कि ये एक वजह थी जिसकी वजह से गुजरात में चुनाव कराने की घोषणा गुरुवार को नहीं की गयी. उन्होंने ये बी कहा कि चुनाव आयोग नहीं चाहता कि हिमाचल चुनाव के नतीज़ों का असर गुजरात के चुनावी माहौल पर पड़े इसलिए गुजरात में चुनाव 18 दिसंबर से पहले होंगे.

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मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ किया कि गोवा के बाद हिमाचल प्रदेश दूसरा राज्य होगा जहां ईवीएम मशीनों के साथ वीवीपेट व्यवस्था बहाल की जाएगी जिससे मतदाताओं को ये पता चल सके कि उन्होंने जिस उम्मीदवार के पक्ष में बटन दबाया है वो सही में उसके पक्ष में गया या नहीं. ​ए के जोती ने ये भी साफ किया कि सैद्धांतिक तौर पर चुनाव आयोग लोक सभा और विधान सभा में एक साथ चुनाव कराने को तैयार है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि 1952 से 1967 तक देश में लोक सभा और राज्यों में चुनाव एक साथ ही हुए थे लेकिन बाद में कुछ राज्यों में विधान सभा भंग होने की वजह से ये व्यवस्था बहाल नहीं रह सकी.

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उन्होंने कहा कि इसके लिए आयोग को सैंकड़ों और ईवीएम्स और वीवीपेट सिस्टम की ज़रूत होगी लेकिन आयोग चार महीने में इसकी तैयारी करने में सक्षम भी है. हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ने साथ ही ये भी साफ कर दिया कि राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें हैं. ऐसे में लोक सभा और राज्यों में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले ये ज़रूरी होगा कि इस राजनीतिक सहमति बनाकर ही आगे बढ़ा जाए.


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