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नियमों को ताक पर रखकर सालों से चल रहा था होटल, निगम की लापरवाही ने लील ली 17 जिंदगियां

देश की राजधानी में अर्पित होटल (Hotel Arpit Palace) जैसे दर्जनों होटल निगम की नाक के नीचे कायदे कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं.

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नियमों को ताक पर रखकर सालों से चल रहा था होटल, निगम की लापरवाही ने लील ली 17 जिंदगियां

होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई.

खास बातें

  1. करोलबाग के होटल में लगी आग से 17 की मौत
  2. नियमों को ताक पर रखकर सालों से चल रहा था होटल
  3. राजधानी के दर्जनों होटलों में हो रही नियमों की अनदेखी
नई दिल्ली:

दिल्ली के करोलबाग में अर्पित होटल (Hotel Arpit Palace) में हुए दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम ने अलग-अलग जांच कमेटी बनाई है. लेकिन देश की राजधानी में अर्पित होटल जैसे दर्जनों होटल निगम की नाक के नीचे कायदे कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. अगर दिल्ली के होटलों में कायदे कानूनों की अनदेखी पर नगर निगम समय पर जागा होता तो होटल अर्पित में सो रहे 17 लोगों की ऐसी दर्दनाक मौत न होती. करोलबाग में होटल अर्पित जैसे करीब 250 होटल और गेस्ट हाउस हैं, लेकिन निगम अधिकारियों की मिलीभगत से दर्जनों होटल बिल्डिंग सेफ्टी के नियमों और कानूनों का उल्लघंन करने के बावजूद चल रहे हैं.

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निगम ने इस होटल को 2006 में तमाम जांच के बाद ट्रेड लाइसेंस जारी किया था. अब निगम की लापरवाही कई मायनों में सामने आ रही है. होटल बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर मिलाकर छह मंजिल है, जबकि चार मंजिल होनी चाहिए. नियम के मुताबिक एक्जिट सीढ़ियों की चौड़ाई 5 फुट और ऊंचाई हर सीढ़ी की तीन इंच होनी चाहिए पर इस होटल में एक्जिट सीढ़ी की चौड़ाई ढाई फुट से भी कम है. होटल में एक ग्राउंड और एक टॉप फ्लोर पर गैर कानूनी तौर पर दो किचन बने हुए थे. हालांकि निगम इसका ठीकरा दिल्ली फायर डिपार्टमेंट पर डाल रहा है. उत्तरी नगर निगम के मेयर आदेश गुप्ता ने कहा, 'देखिए फायर डिपार्टमेंट की एनओसी के बाद ही निगम लाइसेंस देती है, लापरवाही फायर विभाग की रही है. लेकिन हमारी खामियां भी रही होंगी इसलिए हममे जांच कमेटी बनाई है.

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होटल की आग भले 8 बजे तक बुझ गई, लेकिन सवाल अभी भी सुलग रहे हैं. निगम का कहना है कि करोल बाग ओल्ड सिटी में है और इसलिए यहां बिल्डिंग प्लान की जरूरत नहीं होती है, लेकिन फिर बिना बिल्डिंग प्लान के फायर सेफ्टी की एनओसी कैसे मिल गई. फायर डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक होटल में फायर सेफ्टी के सारे उपकरण सही हालत में थे. फ्रंट और एक्जिट दो सीढ़ियां भी थी. कमरे के अंदर वूडेन और प्लास्टिक फ्लोरिंग होने के वजह से आग बाहर नहीं निकल पाई. प्लास्टिक का धुंआ जहरीला होता है, इससे लोगों का दम घुटा.

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हालांकि दिल्ली सरकार ने फायर डिपार्टमेंट को क्लीन चिट देकर निगम को तलब करने का फैसला किया है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, 'ये होटल छह मंजिला कैसे बन गया. हम जांच कमेटी बना रहे हैं निगम को तलब करेंगे कि कैसे नियमों की धज्जियां उड़ाई गई. दरअसल करोलबाग और पहाड़गंज की इन्हीं संकरी गलियों में दिल्ली के 60 फीसदी होटल हैं. यहां आग लगने की सूरत में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल है.

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उधर, केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कहा कि करोलबाग के जिस होटल में भीषण आग लगी उसका आपातकालीन द्वार 'बहुत संकरा' था और उस पर ताला भी लगा था. घटनास्थल का दौरा करने के बाद मंत्री ने कहा कि उन्हें लगता है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है. केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि होटल के अंदर लकड़ी के कई ढांचे थे, जिनसे आग को फैलाने में मदद मिलने की आशंका है. उन्होंने कहा, 'जब मैं आपातकालीन द्वार के पास गया तो मैंने देखा कि इस पर बीती रात ताला लगा था. यह बहुत संकरा भी था.'

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VIDEO: करोल बाग के होटल में भीषण आग

उन्होंने कहा, 'जाहिर तौर पर, अगर लोग आपातकालीन द्वार पर आए भी होते तो वे बच नहीं सकते थे क्योंकि यह बहुत संकरा था और इस पर ताला भी लगा था.' अल्फोंस ने कहा कि उन्होंने महापौर से बात करके यह पता करने को कहा है कि सभी नियमों का पालन हो रहा था या नहीं और अगर होटल प्रबंधन द्वारा कोई लापरवाही बरती गई तो तत्काल कार्रवाई की जाए.


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