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मनी लॉन्ड्रिंग मामला : दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके दो करीबियों से ED ने की पूछताछ

ईडी ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके करीबी सुनील कुमार जैन व अजीत कुमार जैन से पूछताछ की

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मनी लॉन्ड्रिंग मामला : दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके दो करीबियों से ED ने की पूछताछ

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. कोलकाता से कई कंपनियों द्वारा आए करोड़ों रुपये के बारे में पूछताछ
  2. चार कंपनियों के बारे में मांगी गई जानकारी
  3. जैन, उनकी पत्नी और चार अन्य के खिलाफ दर्ज है मामला
नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज पूछताछ की. सत्येंद्र जैन के दो बेहद करीबी कारोबारी पार्टनर और रिश्तेदार से भी पूछताछ की गई.

सत्येंद्र जैन और अन्य के खिलाफ धन शोधन का एक मामला दर्ज है. प्रवर्तन निदेशालय ने इसी मामले में पूछताछ की है. ईडी ने सत्येंद्र जैन के करीबी सुनील कुमार जैन और अजीत कुमार जैन से भी पूछताछ की. सत्येंद्र जैन से जामनगर हाउस स्थित ईडी के दफ्तर में पूछताछ की गई. उनसे सुबह 11 बजे से पूछताछ शुरू हुई. बताया जाता है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता से कई कंपनियों द्वारा आए करोड़ों रुपये के बारे में पूछताछ की. सत्येंद्र जैन से जुड़ी कंपनी अकिंचन डेवलपर्स, प्रयास इन्फो सॉल्यूशन आदि कंपनियों के बारे में पूछताछ की गई

अधिकारियों ने बताया कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जैन को तलब किया गया था. मामले का जांच अधिकारी उनके बयान को दर्ज करेगा.


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सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर पिछले वर्ष अगस्त माह में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन का मामला दर्ज किया था. सीबीआई में दर्ज शिकायत में कहा गया कि जैन उन चार कंपनियों को प्राप्त धन का स्रोत नहीं बता पाए जिन कंपनियों में वह शेयरधारक थे.

सीबीआई ने उनके, उनकी पत्नी और चार अन्य के खिलाफ धन शोधन का एक मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने इस मामले में उनसे पहले भी पूछताछ की थी.

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VIDEO : सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ीं

सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि कथित तौर पर 4.63 करोड़ रुपये प्रयास इंफो सॉल्यूशंस, अकिंचन डेवलपर्स, मंगलयातन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स प्रालि के जरिए वर्ष 2015-16 में प्राप्त किए गए. उन्होंने बताया कि जैन और उनकी पत्नी की उक्त अवधि में इन कंपनियों में कथित तौर पर एक तिहाई हिस्सेदारी थीं.
(इनपुट भाषा से भी)



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