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दिल्ली का बहुप्रतीक्षित रानी झांसी फ्लाईओवर खुला, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने इस वजह से की जांच की मांग

दिल्ली का अब तक का सबसे ज्यादा इंतजार कराने वाला और देरी से बनने वाला रानी झांसी फ्लाईओवर को आम जनता के लिए खोल दिया गया है.

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दिल्ली का बहुप्रतीक्षित रानी झांसी फ्लाईओवर खुला, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने इस वजह से की जांच की मांग

रानी झांसी फ्लाईओवर आम लोगों के लिए खोला गया.

नई दिल्ली: दिल्ली का अब तक का सबसे ज्यादा इंतजार कराने वाला और देरी से बनने वाला रानी झांसी फ्लाईओवर को आम जनता के लिए खोल दिया गया है. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री और चांदनी चौक के सांसद डॉ हर्षवर्धन ने इसका उद्घाटन किया. इस मौके पर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, दिल्ली बीजेपी प्रभारी श्याम जाजू उपस्थित रहे. उद्घाटन के दौरान केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि 'ये फ्लाईओवर बहुत मुश्किल फंसा था. मैंने जब समझने की कोशिश करी की आखिर 15-20 साल से ये प्रोजेक्ट क्यों लटका है. 15 साल तो दिल्ली में एक सरकार रही. 10 साल तक एक ही सांसद रहा. इस सबके बावजूद ये प्रोजेक्ट क्यों नही हुआ? तो मुझे लोगों ने बताया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी और उन लोगों को लगता था कि ऐसा होगा वैसे होगा.'

लेकिन इस कार्यक्रम में सब उस समय चौंक गए जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल ने इतनी देरी से बने फ्लाईओवर की जांच की मांग की और कहा 'मैं चाहता हूं एक रिपोर्ट ज़रूर बननी चाहिए कि जिस फ्लाईओवर को 2 साल में पूरा हो जाना चाहिए था, उसको 10 साल क्यों लग गए? विजय गोयल की इस मांग पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर (फ्लाईओवर बनाने की ज़िम्मेदार अथॉरिटी) आदेश गुप्ता ने कहा ' वो अलग विषय है फिलहाल आप खुश रहने दीजिए कि जनता को खुशी मिली है कि फ्लाईओवर खुल गया है.'

उधर, विजय गोयल द्वारा जांच का मुद्दा उठाए जाने का दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी समर्थन किया है. मनोज तिवारी ने कहा कि विजय गोयल जी आपने जो प्रश्न उठाया है वह गंभीर मुद्दा है, उसपर जांच बनती है. साफ नियत से आगे बढ़ते हैं और जनता के सामने जल्द सच्चाई आएगी.

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1.6 किलोमीटर लंबा रानी झांसी फ्लाईओवर पूसा रोड अपर रिज और रोहतक रोड को फिल्मिस्तान सिनेमा, डीसीएम चौक, आजाद मार्केट और रोशनआरा रोड के जरिए ISBT कश्मीरी गेट से जोड़ेगा. इस फ्लाईओवर के खुल जाने से कश्मीरी गेट, करोल बाग, मोरी गेट, कमला नगर, सदर बाजार, पहाड़गंज और आजाद मार्केट में लगने वाले भारी ट्रैफिक और जाम से कुछ राहत मिलेगी .

6 लेन के रानी झांसी फ्लाईओवर को बनाने की बात 21 साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन खराब तालमेल और तकनीकी समस्याओं के चलते 2008 में जाकर फ्लाईओवर बनाने के लिए टेंडर दिया गया. लेकिन कंस्ट्रक्शन 2009 में जाकर ही शुरू हुई. रानी झांसी फ्लाईओवर को बनाए जाने की पहली डेडलाइन सितंबर 2010 थी जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल होने थे.

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'डेडलाइन का फ्लाईओवर'
रानी झांसी फ्लाईओवर को डेडलाइन का फ्लाईओवर भी कहा जाता है क्योंकि जितनी डेडलाइन इस फ्लाईओवर ने चूकी हैं दिल्ली में शायद ही किसी दूसरे फ्लाइओवर ने चूकी हों. रानी झांसी फ्लाईओवर को पूरा करने की पहली डेडलाइन सितंबर 2010 थी, यानी कॉमनवेल्थ गेम्स के समय. लेकिन यह डेडलाइन ऐसी मिस हुई कि आज तक डेडलाइन मिस होने के अंबार लगे हुए हैं. ये फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पहली डेडलाइन मिस होने के बाद सालों तक ऐसे ही चलता रहा लेकिन एलजी अनिल बैजल की सख्ती के बाद साल 2017 में चार बार डेडलाइन देने के बावजूद यह फ्लाईओवर पूरा नहीं हो सका. इसके बाद इसी साल मार्च, फिर जून और फिर 15 अगस्त की डेडलाइन मिस हो चुकी है. यानी यह फ्लाईओवर कुल 8 डेडलाइन मिस कर चुका है.

कितना महंगा पड़ा यह फ्लाईओवर?
साल 2006 में जब फ्लाईओवर का टेंडर दिया गया तो शुरुआती आकलन में इस फ्लाईओवर निर्माण की कीमत करीब 178 करोड़ रुपये आंकी गई लेकिन समय बीतता रहा, डेडलाइन मिस होती रही और इसी के चलते इस फ्लाईओवर की कीमत इसकी शुरुआती कीमत से कई गुना बढ़कर करीब 725 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

कितना कुछ बदल गया इस फ्लाईओवर के निर्माण में
रानी झांसी फ्लाईओवर बनने में इतना समय लग गया कि जैसे युग ही बीत गया. जिस समय रानी झांसी फ्लाईओवर के बारे में सोचा गया उस समय दिल्ली में शीला दीक्षित नई-नई मुख्यमंत्री बनकर आई थीं. यही नहीं जिस समय इस फ्लाईओवर का टेंडर दिया गया दिल्ली में नगर निगम केवल एक था, यानी एकीकृत था. इसी वजह से इस फ्लाईओवर को बनाने का काम शुरू तो किया दिल्ली नगर निगम ने लेकिन इसको पूरा कर रहा है उत्तरी दिल्ली नगर निगम. जिस समय इस परियोजना के बारे में सोचा गया या काम शुरू हुआ तब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार और दिल्ली की ज़्यादातर लोकसभा सीटों पर कांग्रेस काबिज़ थी लेकिन आज न दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस है और न दिल्ली से कांग्रेस का नेता सांसद.

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क्यों यह फ्लाईओवर बना बीरबल की खिचड़ी
रानी झांसी फ्लाईओवर के कार्य को पूरा करने के लिए एकीकृत निगम से लेकर निगम के बंटवारे के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी बाधा इसके निर्माण के रास्ते में आने वाली दुकानों को स्थानांतरित करना था. इतना ही नहीं दो बड़े धार्मिक स्थलों को भी हटाना किसी चुनौती से कम नहीं था. सुप्रीम कोर्ट से भी कई बार यहां की जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगी. अधिकारी बताते हैं कि इस फ्लाईओवर को बनाने में जो कीमत में कई गुना बढ़ोतरी हुई उसका सबसे बड़ा कारण है जमीन अधिग्रहण के लिए किया गया भुगतान. शुरुआत में जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 70 करोड़ रुपये का अंदाजा था लेकिन इसका आंकड़ा करीब 550 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.

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एक नजर: 
1997- तत्कालीन एकीकृत दिल्ली नगर निगम ने इस रूट पर फिजिबिलिटी स्टडी कराई गई.
2006- एलजी ने रानी झांसी फ्लाईओवर को मंज़ूरी दी. लागत 177.72 करोड़ रुपये 
जून 2008- निर्माण का ठेका दिया गया 
इस दौरान कुछ धार्मिक स्थल बीच मे आये तो स्थानीय लोगों ने एलजी ने पुनर्विचार के लिए कहा. एलजी ने भी कहा कि धार्मिक स्थल का ध्यान रखा जाए.
2014: एलजी ने 724.22 करोड़ की लागत को मंज़ूरी दी. बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण में गया.

निगम के मुताबिक सबसे ज़्यादा समस्या हुई और वक़्त लगा निजी लोगों से ज़मीन अधिग्रहण में. रेलवे और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड से ज़मीन एक्सचेंज करने में, DDA मार्किट शिफ्ट करने में, दिल्ली सरकार स्कूल शिफ़्ट करने में , निगम के स्कूल, बाजार, तहबाजारी और टॉयलेट आदि शिफ़्ट करने में. करीब 27 किलोमीटर की ज़मीन इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दूसरों से ली गई.
दिसंबर 2017- निगम को ज़मीन का आखिरी टुकड़ा मिला फ्लाईओवर बनाने के लिए.
कुल लंबाई- 1.6 किलोमीटर  


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