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मैक्स हॉस्पिटल में बच्चे की मौत का मामला : डीएमसी ने डॉक्टरों को दी क्लीन चिट

दिसंबर 2017 में एक जिंदा बच्चे को मैक्स हॉस्पिटल शालीमार बाग द्वारा मृत घोषित करके उसे पैक करके मां-बाप को दे दिया गया था

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मैक्स हॉस्पिटल में बच्चे की मौत का मामला : डीएमसी ने डॉक्टरों को दी क्लीन चिट

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. मेडिकल कौंसिल ने कहा, मैक्स की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही नहीं हुई
  2. अस्पताल का लाइसेंस दिल्ली सरकार ने कैंसिल कर दिया था
  3. एक नर्सिंग होम में एक हफ्ते बाद इलाज के दौरान बच्चे की मौत हुई थी
नई दिल्ली: मैक्स हॉस्पिटल में लापरवाही से बच्चे की मौत के मामले में दिल्ली मेडिकल कौंसिल ने जांच पूरी कर ली है.जांच में डॉक्टरों को दोषी नहीं पाया गया.कौंसिल ने जांच के बाद डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी है.

एक जिंदा बच्चे को मैक्स हॉस्पिटल शालीमार बाग द्वारा मृत घोषित किया था और पैक करके मां-बाप को दे दिया गया था जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस भी दिल्ली सरकार ने कैंसिल किया था.बीते साल दिसंबर में यह मामला सामने आया था.

मैक्स अस्पताल में जुड़वां बच्चों को कथित रूप से मृत घोषित करने के मामले को देख रही दिल्ली चिकित्सा परिषद ( डीएमसी ) ने अस्पताल को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उसकी तरफ से कोई भी चिकित्सकीय लापरवाही नहीं हुई है. मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को दी अपनी रिपोर्ट में डीएमसी ने कहा कि अस्पताल ने उस बच्चे को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था जिसका दिल चार-पांच घंटे तक धड़कता रहा था, क्योंकि परिवार ने ‘डू नॉट रिससिटैट ’(डीएनआर ) दस्तावेज यानी पुनर्जीवित नहीं करने वाले कागजात पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि डॉक्टरों ने पुन: होश में लाने की प्रक्रिया को लेकर सलाह दी थी. अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त अलोक कुमार ने पुष्टि की है कि उन्हें डीएमसी से रिपोर्ट मिली है और कहा कि वे इसका अध्ययन करेंगे.

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डीएमसी ने बच्चे के परिवार के सदस्यों और डॉक्टरों तथा स्टाफ के बयान दर्ज किए. डीएमसी ने कहा कि प्रक्रियागत खामियां थी और अपर्याप्त दस्तावेजीकरण था जो शायद ऐसे मामलों को देखने के दौरान उचित दिशा - निर्देश नहीं होने की वजह से है. डीएमसी की रिपोर्ट के मुताबिक , शिकायतकर्ता के नवजात बेटे को दिए गए इलाज में मैक्स सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के डॉक्टरों को मेडिकल लापहरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.

इस अस्पताल ने पिछले साल 30 नवंबर को जन्म के बाद एक बच्चे को कथित रूप से गलत तरीके से मृत घोषत कर दिया था. हालांकि बच्चा जीवित था और पीतमपुरा के एक नर्सिंग होम में एक हफ्ते बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हुई थी. वहीं उसकी जुड़वां बहन मृत पैदा हुई थी. इन बच्चों का जन्म 23 हफ्ते की गर्भावस्था में हुआ था.
(इनपुट भाषा से भी)


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