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अब दिल्ली के मंत्री लेंगे अफसरों और कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के फैसले

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले और पोस्टिंग के लिए फैसले लेने का अधिकार मंत्रियों को दे दिया गया

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अब दिल्ली के मंत्री लेंगे अफसरों और कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के फैसले

मनीष सिसोदिया ने मंत्रियों को अफसरों और कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के अधिकारों के संबंध में आदेश जारी किया है.

खास बातें

  1. डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आदेश जारी किया
  2. कहा, दिल्ली की जनता से एलजी को माफ़ी मांगनी चाहिए
  3. सीएस से कहा, राशन डोर स्टेप और सीसीटीवी पर जल्द कार्यवाही शुरू हो
नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार बनाम उप राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले और पोस्टिंग के लिए फैसले लेने का अधिकार मंत्रियों को दे दिया गया है. इस बारे में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आदेश जारी कर दिया है.  

दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री  IAS/ DANICS, उप मुख्यमंत्री- ग्रेड 1/2 DASS, प्राइवेट सेक्रेटरी मंत्री (सर्विसेज)- ग्रेड 3/4 DASS व ग्रेड 2/3 स्टेनो, शेष विभागों के संबंधित मंत्री बाकी सभी कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के फैसले ले सकेंगे. दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं.

डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने जो फैसला दिया है उस पर कैबिनेट मीटिंग हुई थी. लॉ मिनिस्टर ने फैसले को सामने रखा. सरकार ने निर्देश दिए हैं कि उसी हिसाब से सभी काम होंगे. अधिकारियों को कैबिनेट ने दिशानिर्देश दिए हैं. सीएस से कहा गया है कि राशन डोर स्टेप और सीसीटीवी पर जल्द कार्यवाही शुरू की जाए. उसे तुरंत कैबिनेट में लाया जाए.


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सिसोदिया ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद एलजी ने सरकार से ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार अपने पास रख लिए थे या डिपार्टमेंट हेड को दे दिए थे. कुछ अधिकार सीएस को दिए गए थे. थोड़ी देर पहले मैंने आर्डर दिए हैं कि आईएस दानिक्स के ट्रांसफर सीएम के अप्रूवल से होंगे, ग्रेड 2 डिप्टी सीएम, ग्रेड 3 और 4 के लिए सर्विस डिपार्टमेंट मंत्री की मंजूरी ली जाएगी.

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो ऑर्डर है उसे स्टडी किया है. पहले हमने कुछ संविधान के बिंदु रखे थे. तीन सब्जेक्ट को छोड़कर सरकार को कानून बनाने के अधिकार होंगे. यानी पब्लिक आर्डर, पुलिस, लैंड को छोड़कर सरकार और दिल्ली विधानसभा को कानून बनाने के अधिकार थे. उन्होंने कहा कि मई में मोदी सरकार ने चौथा सब्जेक्ट सर्विस भी जोड़ दिया था. प्रॉब्लम थी, क्योंकि तीन की जगह चार विषय जोड़ दिए गए थे. सारे पॉवर एलजी को दिए गए. शीला जी के पास अगर आधा राज्य था तो उस आर्डर के बाद 10% अधिकार कर दिए गए.  

उन्होंने कहा कि संविधान के हिसाब से एलजी के पास पॉवर नहीं था लेकिन एलजी ने गलत व्याख्या करते हुए मोदी जी की तरह काम करना शुरू कर दिया. एलजी के पास अब पॉवर नहीं है. ट्रांसफर सब्जेक्ट पर कोई परमीशन की जरूरत नहीं है. तीन विषयों के अलावा हमने जब गेस्ट टीचरों को परमानेंट करने की कोशिश की थी तो उन्होंने यही कहकर मना किया था कि हमारे पास पॉवर नहीं हैं. टीचर को फ़िनलैंड भेजने पर भी हमसे परमीशन नहीं ली गई. यह इसी मिस इंटरप्रिटेशन के कारण हुआ था कि सिर्फ पार्लियामेंट के पास पॉवर है, तीन सब्जेक्ट के अलावा कानून बनाने पर. उस कानून को राज्य की विधानसभा से भी पास कराने की जरुरत है जैसा कि जीएसटी में हुआ. कल को पांचवा और छठा भी सब्जेक्ट केंद्र जोड़ सकता था.

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VIDEO : अब दिल्ली सरकार ले सकेगी फैसले

सिसोदिया ने कहा कि 400 फाइलें रोककर इसी के आधार पर अधिकारियों को डराया गया. हमारे काम को प्रभावित किया गया. एलजी को इंडिपेंडेंट डिसीजन मेकिंग पॉवर नहीं है. एलजी को सिर्फ मंत्रिमंडल की सिफारिश पर काम करने के लिए कहा गया है. संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. हम सुप्रीम कोर्ट के आभारी हैं कि उन्होंने विस्तृत फैसला दिया. दिल्ली की जनता से एलजी को माफ़ी मांगनी चाहिए.



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