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सुषमा ने महिला एवं बाल विकास मंत्री से तीन वर्षीय बच्ची शेरिन मैथ्यूज को गोद लेने की प्रक्रिया की जांच का आग्रह किया

इस बच्ची का शव अमेरिका के डल्लास में एक पुलिया के नीचे से बरामद हुआ था.

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सुषमा ने महिला एवं बाल विकास मंत्री से तीन वर्षीय बच्ची शेरिन मैथ्यूज को गोद लेने की प्रक्रिया की जांच का आग्रह किया

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से तीन वर्षीय बच्ची शेरिन मैथ्यूज को गोद लिए जाने की प्रक्रिया की जांच करने का आग्रह किया है. इस बच्ची का शव अमेरिका के डल्लास में एक पुलिया के नीचे से बरामद हुआ था. शेरिन सात अक्तूबर को लापता हो गई थी और उसका शव रविवार को टेक्सास के डल्लास में एक पुलिया से बरामद हुआ था. उसके पिता वेसले मैथ्यूज (37) को उसके विरोधाभासी बयानों के चलते सोमवार को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया. इससे पहले भी उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मुचलके पर रिहा कर दिया गया था.

सुषमा ने  ट्वीट किया, ‘बच्ची सरस्वती शेरिन मैथ्यूज के मामले के बाद, महिला एवं बाल विकास मंत्री से गोद लेने की प्रक्रिया की गहन जांच कराए जाने का आग्रह किया है.’ उन्होंने कहा कि मामले में जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए और अब से गोद लिए गए बच्चों के लिए पासपोर्ट महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही जारी किए जाएंगे.

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सूत्रों के अनुसार भारत में बच्चों को गोद लेने से संबंधित नोडल इकाई केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने भी यूएस सेंट्रल अथॉरिटी फॉर हेग एडोप्शन को पत्र लिखकर शेरिन की मौत के मामले में ब्यौरा मांगा है. एक अधिकारी ने बताया कि इसे अमेरिका में शेरिन मैथ्यूज के मामले को देख रही दत्तक ग्रहण एजेंसी से समय पर रिपोर्ट मिली हैं. होल्ट इंटरनेशनल ने आठ जुलाई 2016 को बच्ची को गोद लिए जाने के बाद से चार रिपोर्ट कारा को भेजी थीं. इन रिपोर्टों में यह बताया गया था कि किस तरह बच्ची अपने नए घर में ‘अच्छी तरह ढल रही है’ और नए माहौल में ‘सुरक्षित तथा सुखद’ प्रतीत होती है. हालांकि, इन आकलनों के अनुसार शेरिन को खाने से संबंधित समस्याएं प्रतीत होती थीं.

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एक रिपोर्ट के अनुसार ‘परिवार के लिए खाना खिलाना अधिक चुनौतीपूर्ण बन गया है.’ ‘वह बाहर का खाना पसंद करती है, न कि घर का.’ शेरिन की मौत से पहले चौथी और अंतिम रिपोर्ट में कहा गया, ‘हमने कई रणनीतियों पर चर्चा की जो मददगार हो सकती हैं’ और ‘इस चक्र को तोड़ने तथा अधिक गंभीर दीर्घकालिक खानपान चिंताओं से बचने के लिए अतिरिक्त भोजन समय की आवश्यकता है.’ कारा के एक अधिकारी के अनुसार बच्ची गोद लिए जाने के समय से ही अल्पपोषित थी और उसकी उम्र के हिसाब से उसका वजन कम था.कारा के सीईओ ने कहा कि इस लड़की का जन्म 14 जुलाई 2014 को हुआ था और इसे उसके माता पिता ने बिहार के गया में उसे सौंपा था. उसे नालंदा मदर टेरेसा सेवा आश्रम अनाथालय भेजा गया था जो अब बंद है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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