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डीयू में दिल्ली वालों को आरक्षण देने के फैसले का शिक्षकों और छात्रों ने किया विरोध

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में स्थानीय छात्रों को 85 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को दिल्ली सरकार ने दी मंजूरी

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डीयू में दिल्ली वालों को आरक्षण देने के फैसले का शिक्षकों और छात्रों ने किया विरोध

दिल्ली विश्वविद्यालय का फाइल फोटो.

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में स्थानीय छात्रों लिए 85 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को शिक्षकों एवं छात्रों ने विश्वविद्यालय के तानेबाने को प्रभावित करने वाले राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम का विरोध किया.

डीयू प्रोफेसर आभा देव हबीब ने कहा, दिल्ली विश्वविद्यालय को उसकी विविधता के लिए जाना जाता है. इसका सम्मान किया जाना चाहिए. पहले भाजपा और अब आप ने विश्वविद्यालय की प्रकृति का सम्मान किए बगैर ये वादे किए. मुझे यह प्रतिगामी राजनीति का हिस्सा लगता है जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय राजनीति के आधार पर हमारे और उनके बीच एक खाई तैयार करना है. दिल्ली विधानसभा में गुरुवार को दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित डीयू के 28 कॉलेजों में दाखिले में शहर के छात्रों को 85 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके साथ सभी विधायकों ने मुद्दा केंद्र, उपराज्यपाल और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाने का वादा किया.

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने कार्यकारी परिषद की आगामी बैठक में फैसले का विरोध करने का वादा करते हुए आप सरकार से स्कूल शिक्षा की दिशा में दिए गए अपने सराहनीय योगदान का विस्तार उच्च शिक्षा में भी करने की अपील की.

डूटा की अध्यक्ष नंदिता नरेन ने कहा, डूटा कार्यकारी परिषद की आगामी बैठक में इस फैसले का विरोध करेगा. वहीं आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के एक डीयू छात्र ने पहचान उजागर न करने के अनुरोध पर कहा कि इस आरक्षण से देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल डीयू का विचार प्रभावित होगा.
(इनपुट एजेंसी से)


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