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दिल्ली में अवैध निर्माण और सीलिंग के मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई छह माह टली

राष्ट्रीय राजधानी में अनाधिकृत निर्माणों को सील होने से बचाने वाले दिल्ली विधि (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2006 और इसके बाद के कानूनों की वैधता का मामला

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दिल्ली में अवैध निर्माण और सीलिंग के मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई छह माह टली

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. कानून की वैधता पर फरवरी में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
  2. कोर्ट ने हाईकोर्ट में लंबित मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया था
  3. कोर्ट में पहले निगरानी समिति और कार्य बल सहित अन्य मुद्दों पर सुनवाई
नई दिल्ली: दिल्ली में अवैध निर्माण और सीलिंग के मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अवैध निर्माण को सरंक्षित करने के लिए बनाए गए स्पेशल एक्ट की संवैधानिकता पर सुनवाई छह महीने टाल दी है. कोर्ट ने आज कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में अनाधिकृत निर्माणों को सील होने से बचाने वाले दिल्ली विधि (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2006 और इसके बाद के कानूनों की वैधता से संबंधित मुद्दों पर अगले साल फरवरी में सुनवाई करेगा.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी से कहा कि मामले की अगले साल सुनवाई होगी. नादकर्णी और सीलिंग मामले में अदालत के न्यायमित्र के रूप में मदद कर रहे रंजीत कुमार ने कहा कि इस मामले से संबंधित अन्य मुद्दों पर पीठ द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए.

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कुमार ने अदालत से कहा कि शीर्ष अदालत ने इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने लंबित सीलिंग से संबंधित मामलों को अपने पास स्थानान्तरित किया था. न्यायमूर्ति लोकूर ने कहा, ‘‘हमने गलती की है.’’ नादकर्णी ने पीठ से अनुरोध किया कि कानूनों की वैधता पर दलीलें फरवरी में सुनी जा सकती है लेकिन इस बीच अदालत निगरानी समिति और विशेष कार्य बल सहित अन्य मुद्दों पर सुनवाई कर सकती है.

गत 18 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए. अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किया जाए. साथ ही सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स केअधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कहा गया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि अवैध निर्माण के लिए जो भी बिल्डर, ठेकेदार और आर्किटेक्ट जिम्मेदार हैं, उन्हें ब्लैक लिस्ट करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश जारी किया जाए.


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