चोरों के लिए महज कागज का टुकड़ा था नोबेल पुरस्कार का प्रशस्ति-पत्र, जंगल में पड़ा मिला

चोरों के लिए महज कागज का टुकड़ा था नोबेल पुरस्कार का प्रशस्ति-पत्र, जंगल में पड़ा मिला

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को मिला प्रशस्ति-पत्र चोरी होने के बाद जंगल से बरामद हुआ.

खास बातें

  • नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का प्रशस्ति पत्र जंगल से बरामद
  • दिल्ली पुलिस काफी मशक्कत करने के बाद खोजने में सफल हुई
  • दक्षिण-पूर्व दिल्ली के कालका जी में सत्यार्थी के घर से हुआ था चोरी
नई दिल्ली:

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को मिला प्रशस्ति-पत्र स्वयं सत्यार्थी या देश के लिए कितना भी महत्व रखता हो, चोरों के लिए वह एक कागज के टुकड़े से ज्यादा मायने नहीं रखता था. चोरों ने उसे रद्दी समझकर ही जंगल में फेंक दिया था. दिल्ली पुलिस ने काफा मशक्कत करने के बाद वह प्रशस्ति-पत्र आखिरकार खोज ही लिया. चोरी की वारदात को एक माह से अधिक समय बीतने के बाद यह अहम दस्तावेज दिल्ली के संगम विहार क्षेत्र में जंगल से बरामद हुआ.    

दक्षिण-पूर्व दिल्ली के कालका जी में बाल अधिकार कार्यकर्ता एवं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का घर है. वहां से नोबेल प्रतिकृति, प्रशस्ति-पत्र और अन्य मूल्यवान चीजों की छह-सात फरवरी की रात में चोरी हो गई थी. इस मामले में 12 फरवरी को पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इसके बाद नोबेल प्रतिकृति और अन्य मूल्यवान चीजें तो बरामद कर ली गई थीं लेकिन प्रशस्ति-पत्र नहीं मिला था.

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संगम विहार क्षेत्र के पीछे के जंगल से शुक्रवार को प्रशस्ति-पत्र बरामद कर लिया गया. प्रशस्ति-पत्र को तलाश करने का काम दो दिन चला. इस तलाश में पुलिस बल के साथ-साथ डॉग स्क्वॉड भी लगाया गया. प्रशस्ति-पत्र अपनी पुरानी अवस्था में ही बरामद हुआ है. आरोपी उसे कागज का टुकड़ा समझकर जंगल में फेंक गए थे. प्रशस्ति पत्र के साथ कई अन्य चीजें भी बरामद की गई हैं.

सत्यार्थी ने वर्ष 2015 के जनवरी माह में अपना नोबेल पदक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंप दिया था. वास्तविक मेडल फिलहाल राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में रखा हुआ है.

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कैलाश सत्यार्थी ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद दिया है. उन्होंने कहा है कि ‘‘मैं नोबेल प्रतिकृति और मूल प्रशस्ति-पत्र बरामद करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक पुलिस कर्मी का बेटा हूं. मैंने देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एवं जिम्मेदारी को हमेशा समझा है.’’

कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 में पाकिस्तान की बाल अधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई के साथ नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया था. गौरतलब है कि इससे पहले रवींद्रनाथ ठाकुर को मिला नोबेल पुरस्कार भी पश्चिम बंगाल में चोरी हो चुका है जो कि अब तक नहीं मिला.
(इनपुट एजेंसी से)