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अमित शाह से पहले इन नेताओं को बहस के लिए ललकार चुके सीएम केजरीवाल, लेकिन...

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बहस के लिए ललकारने का दांव बीते कुछ सालों में राजनीति में लाये और उन्होंने ही सबसे ज़्यादा बहस की चुनौती दी लेकिन कभी कोई बहस को नहीं आया.

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अमित शाह से पहले इन नेताओं को बहस के लिए ललकार चुके सीएम केजरीवाल, लेकिन...

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल की फाइल फोटो

खास बातें

  1. अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी अमित शाह को बहस के लिए ललकारा है
  2. ललकारने का दांव बीते कुछ सालों में केजरीवाल ही राजनीति में लाये हैं
  3. केजरीवाल ने सबसे ज़्यादा बहस की चुनौती दी लेकिन कोई बहस को नहीं आया.
नई दिल्ली:

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी अमित शाह को बहस के लिए ललकारा है. क्या यह बहस होगी? अगर होगी तो कहां होगी? और इस बहस का एंकर कौन होगा? इस बहस की नियम व शर्तें क्या होंगी? और कौन यह बहस अपने पक्ष में ले जा पाएगा या जीत पाएगा? इन सब सवालों के जवाब खोजने की या इस बारे में सोचने की ज्यादा जरूरत नहीं क्योंकि पिछले कुछ सालों में इस तरह की बहस की चुनौतियों के अंजाम किसी नतीजे तक पहुंचे ही नहीं यानी बहस की केवल चुनौती दी गई या निमंत्रण दिया गया लेकिन कोई बहस हुई ही नहीं. वैसे बहस के लिए ललकारने का दांव बीते कुछ सालों में केजरीवाल ही राजनीति में लाये और उन्होंने ही सबसे ज़्यादा बहस की चुनौती दी लेकिन कभी कोई बहस को नहीं आया. एक बार तो केजरीवाल को ही बहस के लिए ललकारा गया लेकिन वो खुद भी बहस को नहीं आये.  आइए देखें बीते कुछ समय मे बहस की चुनौतियों के अंजाम 

आखिर क्यों अरविंद केजरीवाल ने एक ही दिन में दो बार अमित शाह को बहस के लिए ललकार दिया?

1. अक्टूबर 2012 में अरविंद केजरीवाल ने गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ही अरविंद केजरीवाल के एनजीओ की फंडिंग पर सवाल उठाए. इसके जवाब में अरविंद केजरीवाल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बहस के लिए चुनौती दी. जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा मैं बहस के लिए तैयार हूं. दिग्विजय की हामी पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारी तरफ से कुमार विश्वास बहस करेंगे. इसके जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह केवल अरविंद केजरीवाल से बहस करेंगे इसके बाद बात ही खत्म हो गई और कोई बहस नहीं हुई. 

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2. जून 2013 में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को बिजली पानी के बढ़े हुए बिल और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में बहस के लिए आने की चुनौती दी.  लेकिन शीला दीक्षित ने तवज्जो नहीं दी और कोई बहस नहीं हुई. 

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3. मई 2014 में जब आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल वाराणसी में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को बहस के लिए आमंत्रित किया और कहा कि आईए खुली बहस करते हैं जिसमें काशी के लोग हम दोनों से सवाल कर सकें. नरेंद्र मोदी ने तवज्जो नहीं दी और कोई बहस नहीं हुई. 

4. जनवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा के चुनाव के दौरान बीजेपी ने किरण बेदी को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जिसके बाद आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल ने किरण बेदी को खुली बहस के लिए बुलाया और कहा कि हम दोनों सीएम उम्मीदवार हैं आइए खुली बहस करें जिसे जनता जाने कि दिल्ली के लिए हम में से कौन सा ही रहेगा किरण बेदी बहस के लिए तैयार नहीं हुई लिहाजा बहस नहीं हुई. 

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5. नवंबर 2015 में जब दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली विधानसभा में जन लोकपाल बिल पेश करने जा रही थी तो आम आदमी पार्टी से निकाले गए नेता प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल को चुनौती देते हुए कहा कि आपने जो लोकपाल बनाया है. वह बहुत कमजोर है आइए जनता के बीच इस पर खुली बहस करें जिससे जनता जान ले कि आप का दावा सही है या मेरा दावा सही है. आम आदमी पार्टी की तरफ से आशीष खेतान आगे आए और उन्होंने कहा मैं बहस के लिए तैयार हूं लेकिन प्रशांत भूषण ने कहा कि मैं सिर्फ अरविंद केजरीवाल से बहस करूंगा लिहाजा कोई बहस नहीं हुई. 

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