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अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी लगने लगे सीसीटीवी कैमरा, निजता का मुद्दा भी उठने लगा

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगवाने शुरू कर दिए हैं.

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अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी लगने लगे सीसीटीवी कैमरा, निजता का मुद्दा भी उठने लगा

अभिभावकों को मोबाइल एप पर अपने बच्चे के क्लासरूम की लाइव फीड देखने का अधिकार मिलेगा

नई दिल्ली:

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगवाने शुरू कर दिए हैं. शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में शहीद हेमू कलानी सर्वोदय बाल विद्यालय में इस योजना का शुभारंभ किया. इस योजना के तहत पूरे स्कूल में सभी क्लासरूम कॉरिडोर और प्ले ग्राउंड में कुल मिलाकर 210 सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं. शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया की इन सीसीटीवी कैमरों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि माता-पिता अपने बच्चे की लाइव फीड अपने मोबाइल पर देख सकते हैं. यानी कि माता पिता को उनके बच्चे की क्लास की लाइव फीड मिलेगी जिससे वो देख सकें कि बच्चा क्या कर रहा है, बच्चा सुरक्षित है या नहीं. केजरीवाल ने कहा कि 'ये दुनिया का पहला स्कूल है जहां पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ते हुए मोबाइल पर देख सकते हैं. बहुत जल्द सभी सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे और आने वाले समय में सीसीटीवी लगाने का ये प्रोजेक्‍ट पूरी दुनिया के लिए एक मील का पत्‍थर साबित होगा.' 

निजता का सवाल
सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के प्रोजेक्ट पर सवाल भी उठने लगे हैं. कहा जा रहा है कि यह निजता का हनन है. ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अशोक अग्रवाल के मुताबिक 'क्लास रूम के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगाना पढ़ने वाले बच्चे और पढ़ाने वाले टीचर की आज़ादी और निजता के अधिकार का हनन है. क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरा लगाने के नकारात्मक नतीजे सामने आ सकते हैं. हालांकि क्लासरूम के अलावा स्कूल के गेट, प्ले ग्राउंड, टॉयलेट के रास्ते आदि पर सीसीटीवी कैमरा ज़रूर लगाया जा सकता है क्योंकि ये सब सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.'

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राष्ट्रीय लोक दल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने केजरीवाल सरकार की इस योजना को लेकर ट्वीट किया और कहा कि 'जबकि दिल्ली की राज्य सरकार ने स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर जो जोर दिया वह सराहनीय है, यह एक उपाय है जो खतरों से भरा है. एक छात्र और शिक्षक के बीच के स्थान पर आक्रमण करना है, ये उचित मानकों को सुनिश्चित नहीं करेगा बल्कि नई समस्या को जन्म दे सकता है.


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निजता के सवाल पर केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कुछ लोगों ने कहा कि इससे बच्‍चों की प्राइवेसी खराब होगी. बच्‍चे यहां पढ़ाई-लिखाई के लिए आते हैं. अनुशासन सीखने आते हैं. अच्‍छा नागरिक बनने आते हैं. अच्‍छा इंसान बनने आते हैं. इसमें कौन सी प्राइवेसी खराब होगी? सीसीटीवी लगने से बच्‍चों को कोई समस्‍या नहीं है, पेरेन्‍ट्स को कोई समस्‍या नहीं है, टीचर्स को कोई समस्‍या नहीं है. सबसे बड़ी बात ये है कि आपके बच्‍चे के क्‍लास रूम का वीडियो आपको लाइव मिलता रहेगा. सरकार एक-एक मिनट सीधे आपके प्रति जवाबदेही होगी. आप सरकार से सवाल पूछ सकते हैं कि आज मेरे बच्‍चे के क्‍लास रूम में ठीक से पढ़ाई क्‍यों नहीं हुई?”

सीसीटीवी योजना
सितंबर 2017 में गुरु ग्राम के एक बड़े प्राइवेट स्कूल में एक बच्चे की हत्या कर दी गई थी. बच्चे का शव स्कूल के टॉयलेट में मिला था. जिसके बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के सभी निजी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के आदेश दिए थे साथ ही दिल्ली के सभी एक हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगवाने की घोषणा भी की थी. इस योजना के तहत दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगने शुरू हो गए हैं. बच्चों के पेरेंट्स को मोबाइल एप्प पर सिर्फ़ अपने बच्चे के क्लासरूम की लाइव फीड देखने का अधिकार मिलेगा. जबकि शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक, इलाके के उप शिक्षा निदेशक और स्कूल के प्रिंसिपल को लिबे फीड के साथ एक महीने पुरानी फुटेज देखने का अधिकार होगा.



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