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दिल्‍ली में विश्व पुस्तक मेला शुरू, दिख रही चीन की 'हिन्दीगि‍री'

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दिल्‍ली में विश्व पुस्तक मेला शुरू, दिख रही चीन की 'हिन्दीगि‍री'
नई दिल्‍ली: भारत ने विश्व पुस्तक मेले में चीन को अतिथि देश का तमगा दिया गया है। चीन ने भी खुश होकर अपने 250 प्रोफेसर, प्रकाशकों और छात्रों की बड़ी टीम भारत भेज दी है।

हालांकि हमने अब तक रूस, फ्रांस, उर्दू और ब्रितानी बहुत सी किताबों का हिंदी अनुवाद पढ़ा है लेकिन चीनी किताबें बहुत कम हैं जिन्हें हम जानते हैं। लेकिन विश्व पुस्तक मेलें में आप किताबों के जरिए चीन की संस्कृति और साझा विरासत जान सकते हैं। यहां रवींद्र नाथ टैगोर से लेकर महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की किताबें चीनी भाषा में दिखी तो वहीं चीन लेखकों की अब कई किताबें हिंदी में आपको दिखाई देंगी।

चीन के पीकिंग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर जियांग जिंगकुई से मेरी मुलाकात पुस्तक मेले में हुई। वो मुझे कैलाश पर्वत औऱ मानसरोवर की एक तस्वीर की तरफ खींच ले गए। बताने लगे कि आप लोग भी कैलाश मानसरोवर को पवित्र मानते हैं और हम लोग भी इनकी पूजा करते हैं। वो भावुक होकर कहते हैं कि भारत और चीन के लोग सोचते हैं कि बॉर्डर को लेकर तनाव रहता है जबकि दोनों देशों की साझा विरासत और धार्मिक परंपरा होने के बावजूद एक दूसरे पर भरोसा नहीं है।

इस विश्व पुस्तक मेले में वो भरोसा कायम होगा। यहीं से कुछ दूर आगे मुझे अनीता मिली जिनका चीनी नाम लिजींग हैं। सबसे पहले उन्होंने भारत का राष्ट्रीय गीत जन गण मन अधिनायक सुनाया फिर फर्रारटेदार आवाज में बॉलीवुड के गानों को सुना कर हंसने लगी। बोली मैं भारत जब भी आती हूं मुझे यहां कुछ अंतर नहीं लगता है, खासतौर पर लेह लद्दाख जाकर।

चीन यहां सिर्फ किताबें लेकर नहीं बल्कि भारत और चीन की साझा विरासत की कई झांकियां भी लाया है जिनके जरिए चीन के उन पहलुओं को आप जान सकते हैं जिनसे रूबरू होकर आप कहेंगे चीन भी नेपाल की तरह हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।


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