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IGI एयरपोर्ट पर मिले संदिग्ध बैग में निकला चॉकलेट, पहले RDX होने की थी आशंका

सीआईएसएफ ने जिस शुरुआती जांच के आधार पर ये कहा कि बैग में आरडीएक्स होने के संकेत मिले हैं, उसका क्या हुआ. इसके चलते करीब ढाई घण्टे अराइवल एरिया को बंद रखा गया.

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IGI एयरपोर्ट पर मिले संदिग्ध बैग में निकला चॉकलेट, पहले RDX होने की थी आशंका
नई दिल्ली :

गुरुवार रात 12:56 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI Airport) पर टर्मिनल 3 के अराइवल एरिया में मेट्रो पिलर नम्बर 4 के पास एक लावारिस ट्रॉली बैग मिला, जिसे सीआईएसएफ के जवान वीके सिंह ने देखा. उसने फौरन इसकी जानकारी अपने अफसरों को दी. इसके बाद फौरन सीआईएसफ ने एक मशीन एक्सप्लोसिव वेपर डिटेक्टर से बैग की जांच की और मशीन ने बैग में आरडीएक्स होने के पॉजिटिव संकेत दिए. सीआईएसफ के डॉग स्क्वाड ने भी विस्फोटक होने के संकेत दिए. इसके बाद बम निरोधक दस्ते को बुलाकर सीआईएसफ ने पूरा एरिया कॉर्डन ऑफ कर दिया और उस जगह वाहनों और यात्रियों की आवाजाही रोक दी. रात करीब डेढ़ बजे सीआईएसफ का बम निरोधक दस्ते ने जब बैग का एक्स रे किया तो उसकी तस्वीरें संदिग्ध दिखीं. इसके बाद रात करीब 3 बजे बैग को एयरपोर्ट के कूलिंग पिट एरिया में ले जाया गया. तलाशी के बाद करीब 3:30 बजे अराइवल एरिया में यात्रियों की आवाजाही शुरू हुई. 

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ये पूरी जानकारी मीडिया में लीक हो गई और खबर चलते ही एयरपोर्ट पर पैनिक फैल गया. सीआईएसएफ के डीआईजी ने भी मीडिया से बात करते हुए बताया कि जांच चल रही है कि बैग में विस्फोटक है कि नहीं लेकिन उन्होंने कहा कि आरडीएक्स होने के पॉज़िटिव संकेत मिले हैं. ये खबर पूरे दिन टीवी चैनलों पर चलती रही और एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच और कड़ी कर दी गयी. सीआईएसएफ ने ये भी बताया कि संदिग्ध बैग 24 घण्टे कूलिंग पिट एरिया में रहेगा उसके बाद ही उसे खोला जाएगा, लेकिन शुक्रवार शाम शाहिद खान नाम का एक शख्स पहुंचा और उसने बताया कि वो बल्लगढ़ का रहने वाला है और ये बैग उसी का है. जिसमें चॉकलेट, चार्जर, कपड़े और ईयरिंग हैं. शाहिद ने बताया कि वो मुंबई से तीन दोस्तों के साथ आया था और गलती से बैग भूल गया. पुलिस के मुताबिक जब बैग खोला गया तो उसमें वही सामान निकला और बैग उस शख्स को सौंप दिया गया. 

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सवाल ये है कि सीआईएसएफ ने जिस शुरुआती जांच के आधार पर ये कहा कि बैग में आरडीएक्स होने के संकेत मिले हैं, उसका क्या हुआ. इसके चलते करीब ढाई घण्टे अराइवल एरिया को बंद रखा गया, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और लोग परेशान रहे. क्या संदिग्ध सामान के जांच करने की यही आधुनिक तकनीक है. मीडिया में खबर लीक करने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों थी? सबसे बड़ी बात ये है कि सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां ये पता नहीं लगा पाईं कि बैग किसने रखा है. पुलिस ने ये खुद माना कि शाहिद अपने आप थाने पहुंचा. ऐसे मामले पर क्या जांच की रफ्तार इतनी धीमी होनी चाहिए? एक संदिग्ध बैग में क्या है और क्या नहीं ये पता चलने में 15 घण्टे से ज्यादा का वक़्त लग गया और वो भी तब जब बैग मालिक ने खुद आकर बैग खोला. 

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सीआईएसएफ का कहना है उनकी ईवीडी मशीन में 1000 तरह के विस्फोटकों को चेक करने के प्रोग्राम फिक्स होते हैं. अगर किसी सामान में किसी विस्फोटक का एक कण भी होता है या किसी प्राकृतिक सामान में कोई केमिकल है तब भी मशीन पॉजिटिव संकेत देती है. ऐसा कई बार होता रहता है लेकिन जांच के बाद अगर कोई विस्फोटक नहीं मिला तो क्लीन चिट दे दी जाती है. लेकिन इस बार सीआईएसएफ का इनटर्नल मैसेज लीक होने से परेशानी बढ़ गयी. अब ये भी जांच कराई जा रही है कि मैसेज किसने लीक किया. शुक्रवार शाम होते होते सीआईएसफ ने ये भी कहा कि जिस एरिया में संदिग्ध बैग मिला था वो उनका इलाका नहीं बल्कि पुलिस का है. 



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