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दिल्ली सीलिंग : भूमि एवं विकास कार्यालय ने निगरानी समिति के दावे का न्यायालय में प्रतिवाद किया 

निगरानी समिति ने हाल ही में न्यायालय में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भूमि एवं विकास कार्यालय ने राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने की गरज से अंतिम क्षणों में अमर कालोनी में सीलिंग अभियान रोक दिया था.

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दिल्ली सीलिंग : भूमि एवं विकास कार्यालय ने निगरानी समिति के दावे का न्यायालय में प्रतिवाद किया 

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नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय में भूमि एवं विकास कार्यालय ने सोमवार को दिल्ली में अनधिकृत निर्माण की सीलिंग की निगरानी के लिये शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के इस दावे का प्रतिवाद किया कि वह सीलिंग अभियान में व्यवधान डाल रहा है. निगरानी समिति ने हाल ही में न्यायालय में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भूमि एवं विकास कार्यालय ने राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने की गरज से अंतिम क्षणों में अमर कालोनी में सीलिंग अभियान रोक दिया था. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि निगरानी समिति की रिपोर्ट का वह जवाब दाखिल करेंगे. नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि वे (निगरानी समिति) कहते हैं कि भूमि एवं विकास कार्यालय सीलिंग अभियान में अड़ंगा लगा रहा है. ऐसा नहीं है हम इसका जवाब दाखिल करेंगे.

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पीठ ने भूमि एवं विकास कार्यालय को सात दिन के भीतर निगरानी समिति की रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देने के साथ ही इस मामले को इसके बाद सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया. निगरानी समिति ने अमर कॉलोनी में 25 जून से होने वाले सीलिंग अभियान के बारे में अपनी रिपोर्ट में भूमि एवं विकास कार्यालय के असहयोगात्मक रवैये का जिक्र किया है. समिति ने दावा किया है कि इससे पहले भूमि एवं विकास कार्यालय ने न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा था कि नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की मदद से इस इलाके की संपत्तियों का पूरी तरह से सर्वेक्षण किया जा चुका है. समिति के अनुसार भूमि एवं विकास कार्यालय के हलफनामे के अनुसार अंधा मुगल, मोतिया खान, सराय रोहिल्ला और अमर कॉलोनी इलाकों का सर्वेक्षण किया गया है और इन चार इलाकों में संपत्तियों की कुछ संख्या 2,354 है.

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समिति के अनुसार सर्वेक्षण के दौरान अतिक्रमण के स्वरूप, दुरुपयोग और अनधिकृत निर्माण संज्ञान में आया और इसका विवरण तैयार किया गया था.समिति ने कहा है कि शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार निगरानी समिति ने भूमि एवं विकास कार्यालय, मध्य क्षेत्र (दक्षिण दिल्ली नगर निगम) के उपायुक्त और पुलिस उपायुक्त की बैठकें आयोजित की गयी जिसमें सीलिंग अभियान की रूपरेखा तैयार की गई. रिपोर्ट के अनुसार अमर कॉलोनी इलाके में 25 जून को सीलिंग अभियान शुरू होना था लेकिन उसी दिन उसे भूमि एवं विकास कार्यालय और उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) से संदेश मिला कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) कानून, 2011 को ध्यान में रखते हुये सीलिंग अभियान स्थगित किया जा रहा है.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि निगरानी समिति अमर कॉलोनी, लाजपत नगर-चार इलाके में न्यायालय के निर्देशानुसार सीलिंग अभियान पूरा करने का इच्छुक है क्योंकि आठ मार्च, 2018 को जिन व्यक्तियों के परिसर सील किये गये थे वे स्थनीय निकायों पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं.(इनपुट भाषा से)



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