दिल्ली: प्रवासी मजदूरों की भूख मिटाने आगे आया ब्रिटिश शख्स, मदद के लिए जुटाए 2 करोड़ रुपए

जैस्पर रीड ने इसकी शुरुआत महज 30 लोगों की मदद से की थी, अब वो लगभग 600 परिवारों का पेट भर रहे हैं.

दिल्ली: प्रवासी मजदूरों की भूख मिटाने आगे आया ब्रिटिश शख्स, मदद के लिए जुटाए 2 करोड़ रुपए

खास बातें

  • अपना बिजनेस है प्रभावित, लेकिन लोगों की मदद में जुटे जैस्पर रीड
  • 30 लोगों से शुरू होकर 600 परिवारों तक पहुंच रही मदद
  • मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए कर रहे बसों की व्यवस्था

दिल्ली में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए एक रेस्टोरेंट के मालिक ब्रिटिश नागरिक जैस्पर रीड ने कमाल कर दिखाया है. ऐसे में जब कोविड-19 महामारी के चलते मजदूरों की रोजगारी छिन गई है और उनके पास खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है, जैस्पर रीड कई लोगों के लिए आशा की किरण बन गए हैं. हालात ऐसे हैं कि रीड का खुद का बिजनेस इस लॉकडाउन में बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन इस संकट को उन्होंने अपने लिए एक मौके में बदल दिया है.

रीड ने अपने साथी मुकेश के साथ मिलकर लॉकडाउन में दूसरों पर निर्भर होने को मजबूर लोगों की मदद के लिए दुनियाभर से 2 करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा किया है. खास बात यह है कि रीड ने इसकी शुरुआत महज 30 लोगों की मदद से की थी, अब वो लगभग 600 परिवारों का पेट भर रहे हैं.

लॉकडाउन के बाद रीड और मुकेश को पता चला कि दिल्ली की एक रिहायशी कॉलोनी में एक कन्स्ट्रक्शन साइट की बिल्डिंग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले 30 मजदूर फंसे हुए हैं. दोनों ने इन मजदूरों से कॉन्टैक्ट किया और उनको तुरंत कुछ दिनों  का राशन-पानी उपलब्ध कराया.

इस तरह पहले हफ्ते में उन्होंने 30 लोगों की मदद की, जो अब 600 परिवारों की मदद करते एक मिशन में तब्दील हो चुका है. रीड और मुकेश यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस लॉकडाउन में वो जितने लोगों की भूख मिटा सकें, उन्हें जरूरी सामान पहुंचा सके, उतना अच्छा.

अभी तक उनकी टीम लोगों को खाना-पानी और राशन दे रही थी, लेकिन अब जैस्पर इस दिशा में एक दूसरा कदम आगे बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने पैदल अपने घरों की ओर जा रहे मजदूरों की मदद के लिए हरियाणा सरकार के साथ मिलकर इन मजदूरों को बस की सुविधा देने की शुरुआत की है.

उनका कहना है कि ‘One Family' इनीशिएटिव का मानना है कि बिजनेस जरूरी है लेकिन इस संकट के दौर में जरूरतमंदों की मदद करना ज्यादा जरूरी है.

उनकी टीम अपने मौजूदा स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से रिक्शावालों, ऑटो-चालकों, घरों में काम करने वाले लोग, मजदूरों और बेघरों के अलावा शेल्टर होम में रह रहे लोगों की मदद कर रही है.

वीडियो: लॉकडाउन में इस तरह बुजुर्गों की मदद कर रहा 'हेल्पेज इंडिया'

 
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