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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन का हिस्सा बनने से किया इनकार

हरियाणा के रोहतक में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने इस बात की घोषणा की.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन का हिस्सा बनने से किया इनकार

अरविंद केजरीवाल ने महागठबंधन के साथ जाने की बात से किया इनकार

खास बातें

  1. 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से कसी कमर
  2. रोहतक में अरविंद केजरीवाल ने किया एेलान
  3. अगले कुछ दिनों में स्थिति और साफ हो जाएगी
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले बनने वाले संभावित मोदी/बीजेपी विरोधी महागठबंधन के हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है. हरियाणा के रोहतक में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते केजरीवाल ने ये बात कही. Arvind Kejriwal से सवाल पूछा गया 'जो गठबंधन की बातें चल रही हैं, ये कहा जा रहा है कि मोदी के ख़िलाफ़ सारा विपक्ष इक्कट्ठा होगा क्या आप उसमे शामिल होंगे? इस सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि 'मेरी सीधी राजनीति जनता की राजनीति है, जनता के विकास की राजनीति है जनता के हितों की राजनीति है हमारी कोई गठबंधन को राजनीति नहीं हमारी सीधी जनता की राजनीति है'.

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दरअसल पिछले कुछ समय से लगातार जिस तरह मोदी विरोधी महागठबंधन की चर्चा चल रही है और सभी विपक्षी पार्टियों के एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बात हो रही है तो उसमें अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी चर्चा में है. चाहे बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की शपथ ग्रहण का मौका हो या बीते शनिवार दिल्ली के जंतर मंतर पर मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में 34 बच्चियों के साथ हुए यौन दुराचार के विरोध का मामला हो, केजरीवाल विपक्षी दलों के साथ जिस तरह खड़े दिखाई दिए उससे लग रहा था कि आम आदमी पार्टी महागठबंधन के हिस्सा बन सकती है लेकिन शायद इस संभावित महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस का उसको कम तवज्जो देना रास नहीं आया.

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राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव मामले में आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के उम्मीदवार को वोट देने की सिर्फ एक शर्त रखी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद केजरीवाल को फ़ोन करके वोट देने को अपील करें. हालांकि कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने फ़ोन ज़रूर किया लेकिन राहुल गांधी ने नहीं जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने उस चुनाव में हिस्सा ही नहीं लिया. यही नहीं दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन और दूसरे नेता भी लगातार आम आदमी पार्टी पर हमले कर रहे हैं जिसके बाद केजरीवाल ने ये बयान दिया.

आख़िर क्यों नहीं बन रही AAP-कांग्रेस की ?

-कांग्रेस की दिल्ली यूनिट और प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन आम आदमी पार्टी से किसी भी तरह के गठबंधन के धुर विरोधी हैं.
- कांग्रेस के दिल्ली में सात सांसद होते थे और 15 साल से अपनी सरकार थी लेकिन केजरीवाल के दिमाग वाले अण्णा आंदोलन और उसके बाद बनी आम आदमी पार्टी ने उसका दिल्ली से सफाया कर डाला. जिसकी वजह से दिल्ली में आज कांग्रेस का न कोई सांसद है ना विधायक.
-दिल्ली में आम आदमी पार्टी सत्ता में है .अगर कोई गठबंधन होगा तो आम आदमी पार्टी कांग्रेस के लिए कुछ सीटें छोड़ेगी तो बदले में पंजाब में सीटें चाहेगी जहां कांग्रेस की सरकार है. शायद उसके लिए कांग्रेस तैयार नहीं.
-कांग्रेस के कुछ नेताओं को हो सकता है कि लगता हो कि जब लोकसभा के चुनाव होंगे और जनता पीएम के लिए वोट करेगी तो ऐसे में वो बीजेपी के साथ सीधे मुकाबले में दिखेगी तो आम आदमी पार्टी से उसका वोट वापस छिटककर आ जायेगा और इस तरह दिल्ली में फिर से कांग्रेस खड़ी हो जाएगी.

VIDEO: अरविंद केजरीवाल ने मुजफ्फरपुर कांड पर रखी अपनी बात.


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-आम आदमी पार्टी दिल्ली में मोदी सरकार और बीजेपी के ख़िलाफ़ लगातार झंडा बुलंद किये हुए है और लगातार आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार उसकी दिल्ली सरकार को काम नहीं करने दे रही, विधायकों नेताओं पर जबरन पुलिस/CBI केस बनवा रही है लेकिन कांग्रेस ने कभी उसका इस लड़ाई में साथ नहीं दिया जबकि अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की बर्खास्तगी के समय उसने कांग्रेस के पक्ष में आवाज़ बुलंद की थी.
 


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