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हमें अपनी प्राथमिकताओं में 'शिक्षा' को शामिल करना होगा : NDTV से बोले मनीष सिसोदिया

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आए बदलाव और शिक्षा नीतियों में सुधारों की चर्चा तेज हो चली है. विरोधियों ने भी स्वीकार किया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कई स्तरों पर सुविधाएं बेहतर हुई हैं.

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नई दिल्ली:

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आए बदलाव और शिक्षा नीतियों में सुधारों की चर्चा तेज हो चली है. विरोधियों ने भी स्वीकार किया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कई स्तरों पर सुविधाएं बेहतर हुई हैं. अरविंद केजरीवाल सरकार में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कंधों पर है. उन्होंने शिक्षा के सिस्टम में किए गए बदलावों पर एक किताब लिखी है जिसका शीर्षक है 'शिक्षा'. इस किताब और दिल्ली के स्कूलों को लेकर मनीष सिसोदिया ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. कार्यक्रम 'हम लोग' में उन्होंने बताया कि इस किताब को लिखने के लिए उनके पास समय की कमी होती थी लिहाजा वो इसे लिखने के लिए गूगल वॉइस टेक्स्ट का इस्तेमाल किया करते थे. उन्होंने माना कि शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के लिए हम शिक्षकों को दोष देते हैं, जोकि सबसे आसान है. क्योंकि अब तक सरकारें सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही को एक दूसरे पर टालते आ रही हैं. सिसोदिया का कहना है कि एजुकेशन की सबसे बड़ी त्रासदी ये है कि शिक्षा के लिए जिम्मेदार तीन अहम लोग, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक अमूमन शिक्षा से सीधे तौर पर जुड़े नहीं होते हैं. जिसकी वजह से वह उन समस्याओं को समझ नहीं पाते हैं, इसलिए इसे बदलने की जरूरत है.

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमें अपनी प्राथमिकताओं में शिक्षा को शामिल करना होगा. उन्होंने बताया कि जब हम (आम आदमी पार्टी) सरकार में आए तो हमने इस पर खूब चर्चा की और काफी चीजों में कटौती करने के बाद शिक्षा के बजट को बढ़ाने का फैसला किया. सिसोदिया ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बहुत सारे लोगों ने मिलकर काम किया, जिसमें आतिशी मर्लिना समेत कई सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं. उपमुख्यमंत्री ने बताया कि हमने दिल्ली में पहले साल में स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने की कोशिश की, दूसरे साल में हमने शिक्षकों को इंटरनेशनल ट्रेनिंग और नॉलेज देने की कोशिश की. और जब दोनों काम अपनी रफ्तार में दिखाई देने लगे तो हमने पढ़ाई-लिखाई के तरीकों को बदलने की कोशिश की और रिजल्ट में इसका असर दिखाई देने लगा.

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एजुकेशन सिस्टम आपकी नजर में क्या है, क्या किसी को नौकरी मिल जाना ही शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, इस सवाल के जवाब में मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम स्कूलों में हैप्पीनेस करिकुलम जैसी गतिविधियां लाएं, ताकि पढ़ा-लिखा इंसान खुश रहना सीखे, चुनौतियों के सामने भी खुश रहना जाने और दूसरों की खुशियों में भी खुश रहना जाने. उन्होंने बताया कि इसी तरह हम आने वाले समय में आंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम और देशभक्ति जैसे करिकुलम लेकर आ रहे हैं. हम स्किल पर काम तो करते हैं लेकिन माइंडसेट पर काम नहीं करते हैं. बकौल सिसोदिया अगर माइंडसेट पर भी काम किया जाएगा तो वह किसी भी विधा को सीखेगा तो उसमें बेहतर प्रदर्शन कर पाएगा.

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इस दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के सवालों के भी जवाब दिए. एक सवाल के जवाब में सिसोदिया ने कहा कि हर स्टूडेंट को आर्ट आना चाहिए. हर व्यक्ति को सृजनात्मकता का होना जरूरी है. क्योंकि अगर ऐसा होता है तो आप कोई भी काम करते हैं उसमें एक नयापन आता है. उन्होंने बताया कि हमने शिक्षा व्यवस्था में बॉटम लिमिट को तय करने की कोशिश की है, ताकि छात्रों को कुछ सुविधाएं कम से कम उपलब्ध कराई जा सकें. उन्होंने दावा किया कि आज दिल्ली के स्कूलों में अच्छी क्वालिटी की सिटिंग अरेंजमेंट, अच्छी क्वालिटी के बोर्ड्स, क्वालिटी एजुकेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा पा रहे हैं.

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमने इस देश में धर्म के नाम पर चुनाव देख लिए, क्षेत्रवाद के नाम पर चुनाव देख लिए. ऐसे में मैं कहूंगा कि आओ, एक चुनाव शिक्षा के नाम पर भी लड़ा जाना चाहिए.



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