दिल्ली: बारिश का पानी बचाने के लिए केजरीवाल सरकार ने योजना को दी मंजूरी

दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत फैसला किया है की पल्ला गांव से लेकर वजीराबाद तक के 20 किलोमीटर के यमुना की आसपास की ज़मीन किराए पर लेकर उसमे 2 मीटर के गड्ढे किये जायेंगे.

दिल्ली: बारिश का पानी बचाने के लिए केजरीवाल सरकार ने योजना को दी मंजूरी

दिल्ली सरकार बना रही है योजना

नई दिल्ली:

दिल्ली की केजरीवाल सरकार (Delhi Government)  ने वर्षा जल संचयन के लिए एक नई योजना तैयार की है. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने फैसला किया है वो दिल्ली के पल्ला से लेकर वज़ीराबाद तक यमुना नदी के आसपास की ज़मीन में गड्ढे खोदकर पानी जमा करेगी. बारिश का जो पानी आएगा वह गड्ढों में जमा हो जाएगा. इससे दो फायदे होंगे पहला तो यह कि जमा हुआ पानी रिस कर जमीन के भीतर जाएगा जिससे कि ज़मीन के नीचे जलस्तर बढ़ेगा, दूसरा गड्ढों में जमा पानी को साफ करके दिल्ली सरकार राजधानी के लोगों उपलब्ध कराएगी. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत फैसला किया है की पल्ला गांव से लेकर वजीराबाद तक के 20 किलोमीटर के यमुना की आसपास की ज़मीन किराए पर लेकर उसमे 2 मीटर के गड्ढे किये जायेंगे. जब यमुना में बरसात का पानी चढ़ेगा तो यह गड्ढे पानी से भर जायेंगे और एक तरह के तालाब में परिवर्तित हो जाएंगे. तालाब का पानी पहले रिसकर जमीन में जाएगा जिससे अंडरग्राउंड वाटर लेवल बढ़ेगा. इसके अलावा जो पानी ऊपर रह जाएगा उसमें साफ करके दिल्लीवासियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.

दिल्ली में रोबोट से कराई जाएगी सीवर की सफाई!

किराए पर ली जाएगी जमीन
इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार ने किसानों से ज़मीन लेने की योजना बनाई जिसको कैबिनेट की मंज़ूरी भी मिल गई हैं. तय किया गया है कि किसानों को ज़मीन किराए पर देने के बदले 77,000 रुपये एकड़ के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. जमीन तय करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू हो जाएगी.

Newsbeep

अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी लगने लगे सीसीटीवी कैमरा, निजता का मुद्दा भी उठने लगा

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


क्या है दिल्ली में पानी का संकट
दिल्ली में रोजाना 1100 एमजीडी पानी की मांग होती है जबकि दिल्ली जल बोर्ड 909 एमजीडी की पानी पूर्ति कर पाता है. दिल्ली को हर साल मानसून में बारिश से 580 MCM पानी मिलता है पर जल संचयन के साधन न होने के कारण 580 MCM में 280 MCM पानी ख़राब हो जाता है.  दिल्ली सरकार को उम्मीद है कि अगर ये योजना कामयाब हो गई तो दिल्ली में पानी का संकट काफ़ी हद तक दूर हो सकता है.