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...जब दिल्ली हाईकोर्ट ने BSF से कहा, 'अपने कांस्टेबल के प्रति कुछ सहानुभूति दिखाइए'

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा, "अप्रसन्न सुरक्षाकर्मी मन लगाकर काम नहीं कर सकते."

...जब दिल्ली हाईकोर्ट ने BSF से कहा, 'अपने कांस्टेबल के प्रति कुछ सहानुभूति दिखाइए'

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि अप्रसन्न सुरक्षाकर्मी मन लगाकर काम नहीं कर सकते.... (फाइल फोटो)

खास बातें

  • अदालत ने कहा अप्रसन्न जवान मन लगाकर काम नहीं कर सकते
  • बीएसएफ ने कर दिया है दिल्ली से शिलांग स्थानांतरण
  • अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई तय की
नई दिल्ली:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से कहा कि वह उस कांस्टेबल के प्रति सहानुभूति दिखाए जिसने अपने स्थानांतरण पर रोक लगाने की मांग की है क्योंकि उसकी पत्नी गर्भवती है. अदालत ने कहा, "अप्रसन्न सुरक्षाकर्मी मन लगाकर काम नहीं कर सकते."  जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस के चावला की एक पीठ ने सीमा सुरक्षा बल से कहा, "उन्हें किसी अन्य स्थान पर तैनात कर दें."

पीठ ने यह बात कांस्टेबल भूदेव सिंह की उस अर्जी पर सुनवाई करते हुए कही जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका स्थानांतरण दिल्ली से तब तक शिलांग नहीं किया जाए जब तक उनकी पत्नी बच्चे को जन्म नहीं दे देती. उन्होंने कहा कि बच्चे का जन्म नवंबर में होने की उम्मीद है.

अदालत ने बीएसएफ के लिए पेश होने वाले केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता संजीव नरूला से कहा, "कुछ सहानुभूति दिखाइए." पीठ ने कहा, "यदि आपके (बीएसएफ) सुरक्षाकर्मी अप्रसन्न रहेंगे, तो वे मन लगाकर काम नहीं कर सकते." नरूला ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से दी गई अर्जी विचाराधीन है. अदालत ने प्राधिकार से कहा कि वह उसका निस्तारण दो सप्ताह में कर दे. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई तय की.

 

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)