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हाईकोर्ट-एनजीटी जहरीली हवा पर सख्‍त, NGT ने कहा- छीना जा रहा है लोगों से जीने का अधिकार

एनजीटी ने कहा कि संविधान के अनुच्‍छेद 21 और 48 के तहत स्वच्छ पर्यावरण सरकार की जिम्मेदारी है, ले‍किन लोगों से जीने का अधिकार छीना जा रहा है.

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हाईकोर्ट-एनजीटी जहरीली हवा पर सख्‍त, NGT ने कहा- छीना जा रहा है लोगों से जीने का अधिकार

एनजीटी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पर्यावरण मंत्रालय तीन दिनों में बुलाए आपात बैठक: हाईकोर्ट
  2. साफ वातावरण बनाए रखने की जिम्‍मेदारी सरकार की
  3. तमाम संवैधानिक और कानूनी संस्थाएं बुरी तरह नाकाम
नई दिल्‍ली: दिल्‍ली में जहरीली गैस के मुद्दे पर गुरुवार को हाईकोर्ट और एनजीटी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. दिल्‍ली हाईकोर्ट ने कहा कि राज्‍य सरकार ऑड-ईवन लाने पर विचार करें और पर्यावरण मंत्रालय इस मुद्दे पर तीन दिन में बैठक बुलाए. वहीं एनजीटी ने दिल्‍ली सरकार से पूछा है कि अभी तक नकली बारिश क्‍यों नहीं कराई. 

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एनजीटी ने कहा कि संविधान के अनुच्‍छेद 21 और 48 के तहत स्वच्छ पर्यावरण सरकार की जिम्मेदारी है, ले‍किन लोगों से जीने का अधिकार छीना जा रहा है. एनजीटी ने कहा कि तमाम संवैधानिक और कानूनी संस्थाएं बुरी तरह नाकाम रही है और प्रदूषण की चिंता सभी की एक साझा ज़िम्मेदारी है.

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एनजीटी ने जहरीली गैस के मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्‍ली, यूपी, हरियाणा और केन्‍द्र सरकार को फटकार लगाई है. एनजीटी ने कहा है कि साफ वातावरण बनाए रखने की जिम्‍मेदारी सरकार की है और दिल्‍ली सरकार से पूछा कि कितने निर्माण काम बंद किए गए और नियम तोड़ने वाले कितने लोगों के चलान किए. 

क्या ऑड-ईवन से कोई फायदा नहीं हुआ?

सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की हवा जहरीली है. पीएम 10 का स्तर जहां 100 होना चाहिए 986 को छू गया है और पीएम 2.5 का स्तर 60 होना चाहिए वो 420 पर है. ये हालत बीते एक हफ़्ते से बरकरार है. एनजीटी ने कहा कि ये शर्मनाक है कि हम अगली पीढ़ी को क्या दे रहे हैं. 


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