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डीपीसीसी मायापुरी के व्यापारियों के खिलाफ जबरन कदम नहीं उठाए : उच्च न्यायालय 

न्यायमूर्ति विभू भाखरू ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि अगली सुनवाई की तारीख 26 अप्रैल तक व्यापारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.

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डीपीसीसी मायापुरी के व्यापारियों के खिलाफ जबरन कदम नहीं उठाए : उच्च न्यायालय 

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को शहर की प्रदूषण नियंत्रण समिति को उन 800 से अधिक व्यापारियों के खिलाफ दंडात्मक कदम नहीं उठाने को कहा जिन्हें पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी में कबाड़ का धंधा करके प्रदूषण फैलाने पर एक एक लाख रूपये का हर्जाना भरने का निर्देश दिया गया है. जब 13 अप्रैल को अधिकारी सीलिंग अभियान के लिए पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की बड़ी टुकड़ी के साथ वहां पहुंचे थे तब हिंसा भड़क गयी थी. न्यायमूर्ति विभू भाखरू ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि अगली सुनवाई की तारीख 26 अप्रैल तक व्यापारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.

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अदालत ने मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र में अपना धंधा करने वाले कई व्यापारियों की अर्जी पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली सरकार और डीडीए से जवाब मांगा. डीपीसीसी ने व्यापारियों से पर्यावरण नुकसान के हर्जाने के लिए एक एक लाख रुपये का भुगतान करने को कहा था. व्यापारियों के वकील कीर्ति उप्पल और साहिल भलैक एवं तुषार गिरि ने डीपीसीसी के आदेश को चुनौती दी. उन्होंने दावा किया कि ये व्यापारी इलाके में मोटर पार्ट्स की दुकानें चलाते हैं और वे किसी प्रदूषणकारी गतिविधियों में संलग्न नहीं हैं. दूसरा, जुर्माना लगाने से पहले व्यापारियों को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया. इस माह के प्रारंभ में डीपीसीसी ने कहा था कि एनजीटी के दिशा-निर्देश पर यह कदम उठाया गया. (इनपुट भाषा से) 


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