'दमघोटू' हुई दिल्ली की हवा: SC की पटाखे छोड़ने की तय सीमा का हुआ उल्लंघन, वायु गुणवत्ता हुई ‘बहुत खराब’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपनी पीठ थपथपाने का अवसर मिला. बेशक, उन्होंने माना कि और भी क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. दिल्ली फायर सर्विस को भी दिवाली की रात पिछली बार से आग लगने के कम कॉल मिले.

खास बातें

  • कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता का स्तर ‘गंभीर’ स्तर को पार गया
  • दिल्ली की हवा में पटाखों की तेज आवाज के साथ ही जहरीला धुंआ और राख भर गया
  • लोग शाम आठ बजे से पहले भी पटाखे छोड़ते दिखे
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में इस साल भी दिवाली पर ख़ूब आतिशबाज़ी हुई और धुआं दिखा. बेशक, पिछले कुछ सालों के मुक़ाबले कम. आंकड़े देखें तो बीते 4 साल में ये सबसे कम प्रदूषण था. लेकिन दिल्ली की हवा फिर भी इतनी ख़राब रही कि किसी को बीमार कर दे. दिवाली की अगली सुबह धुंधली रही. धुंध भी दिखी. हालांकि एजेंसियां बता रही हैं कि इस बार प्रदूषण कम हुआ. सीपीसीबी के एडिशनल डायरेक्टर वी के शुक्ला ने बातचीत में कहा कि पिछली बार से प्रदूषण कम है. मौसम भी स्‍टेबलाइज हो रहा है. उम्मीद है कि हवा की गति बढ़ेगी जिससे जो भी प्रदूषण शहरी क्षेत्र accumulated है वो घटेगा. रात में 40-50% ज़्यादा प्रदूषण आम दिनों की तुलना में. आंकड़ों के आईने में देखें तो ये चार साल का सबसे कम प्रदूषण है. साल 2019 में एयर क्वालिटी इंडेक्स 368 रहा, वहीं 2018 में 390, 2017 में 403, 2016 में 445 और 2015 में ये 360 पर था.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपनी पीठ थपथपाने का अवसर मिला. बेशक, उन्होंने माना कि और भी क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. दिल्ली फायर सर्विस को भी दिवाली की रात पिछली बार से आग लगने के कम कॉल मिले और उनका मानना है कि पटाखे छोड़ने में कमी ही कॉल में कमी की वजह रही. दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि पिछले साल दिवाली की रात 271 कॉल मिले थे जबकि इस बार 245 कॉल्स. कोई मेजर कॉल नहीं मिला जहां हमें ज़्यादा मशक्कत करनी पड़ी हो. पर अधिकतर कॉल ओपन एरिया से आए और ये पटाखे की वजह से ही थे.

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मॉर्निंग वॉक करने घर से निकले लोगों ने भी माना कि दिवाली की अगली सुबह इस बार प्रदूषण उनको कम सता रहा है. लेकिन तीन-चार साल के आंकड़े मिलाकर दिल्ली वाले ख़ुश हो जाएंगे तो अपना नुक़सान करेंगे. गंगाराम के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार का मानना है कि दिल्ली की हवा अब भी ज़हरीली ही है. इसको पुअर या वेरी पुअर जैसी केटेगरी को छोड़कर घातक ही बताना ज़्यादा अच्छा है क्योंकि आज कोई यहां नॉन स्मोकर नहीं. हम 25 हज़ार बार रोज़ाना सांस लेते हैं. 10 हज़ार लीटर हवा हमारे अंदर जाती है. और इसके जरिये 20-25 सिगरेट के बराबर इस ज़हरीली हवा का धुआं हमारे भीतर जाता है.

 
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