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तिहाड़ जेल की पहली महिला इंचार्ज अंजु मंगला ने कहा- 'मुझे जेलर न कहें'...

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तिहाड़ जेल की पहली महिला इंचार्ज अंजु मंगला ने कहा- 'मुझे जेलर न कहें'...

अंजु मंगला अपनी जेल को एक 'गुरुकुल' या 'छात्रावास' कहना पसंद करती हैं.

खास बातें

  1. अंजु मंगला दैनिक आधार पर पुरुष कैदियों के साथ संवाद करती हैं.
  2. तिहाड़ जेल में पुरुषों के कारागार की प्रथम महिला प्रभारी हैं अंजु...
  3. उन्होंने कहा, 'ये कैदी मेरे लिए बच्चों की तरह हैं'.
नई दिल्‍ली:

कड़ी सुरक्षा वाले तिहाड़ जेल में पुरुषों के कारागार की प्रथम महिला प्रभारी अंजु मंगला को खुद को 'जेलर' कहलाना पसंद नहीं है, क्‍यों‍कि उनका मानना है कि यह शब्‍द एक कठोर व्‍यक्ति की छवि को पेश करता है.

अंजु मंगला ने मुस्कुराते हुए कहती हैं कि 'मुझे जेलर न कहें'. दरअसल, दो महिलाएं- किरण बेदी और विमला मेहरा तिहाड़ ने जेल की महानिदेशक के तौर पर सेवाएं दी हैं, लेकिन ऐसा पहली बार है, जब एक महिला को यहां पुरुषों की जेल का अधीक्षक नियुक्त किया गया है. अंजु दैनिक आधार पर पुरुष कैदियों के साथ बातचीत भी करती हैं. इसके साथ ही उनका कहना है कि उनका मंत्र इन कैदियों के साथ एक व्यक्तिगत सौहार्द का माहौल बनाना है चाहे वे महिला हों या पुरुष.

स्‍वभाव से बेहद मिलनसार अधिकारी मंगला कहती हैं कि वह एक 'जेलर' के बजाय एक अधीक्षक कहलाना पसंद करती हैं. दरअसल, उन्हें लगता है कि जेलर शब्द एक 'कठोर' व्यक्ति की छवि पेश होती है. अंजु इससे पूर्व महिलाओं की जेल की अधीक्षक के तौर पर सेवाएं दे चुकी हैं.


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उन्होंने कहा, 'यह एक चुनौती है, लेकिन हमारे डीजी सुधीर यादव ने मेरे ऊपर भरोसा जताया और मैंने यह चुनौती स्वीकार की'. मंगला 18 से 21 वर्ष के आयुवर्ग में करीब 800 कैदियों की देखरेख कर रही हैं.

उन्होंने कहा, 'ये कैदी मेरे लिए बच्चों की तरह हैं. वे काफी जोशपूर्ण, युवा और ऊर्जा से भरपूर हैं, लेकिन उनकी गलती यह है कि उन्होंने कानून अपने हाथ में ले लिया'. मंगला अपनी जेल को एक 'गुरुकुल' या एक 'छात्रावास' कहना पसंद करती हैं, जहां इन कैदियों को शिक्षा दी जाती है. (इनपुट भाषा से भी)



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