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फेलो ऑफ नेशलन अकैडमी के लिए चुने गए जामिया के प्रोफेसर

डॉ. अशरफ ने हाई ऐल्टिट्यूड थ्राम्बोसिस के क्षेत्र में बड़ा अनुसंधान करके सियाचिन जैसे अति उच्च स्थलों पर तैनात सैनिकों में ब्लड क्लॉटिंग की होने वाली आम समस्या के राज़ खोले हैं.

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फेलो ऑफ नेशलन अकैडमी के लिए चुने गए  जामिया के प्रोफेसर

प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद ज़ाहिद अशरफ (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

सियाचिन सहित हिमालय पर्वत क्षेत्र में तैनात सैनिकों में होने वाली ब्लड क्लॉटिंग समस्या पर विशेष काम करने वाले जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नैचुरल साइंस फैकल्टी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद ज़ाहिद अशरफ को देश की प्रतिष्ठित नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज (एफएनएएससी) में शामिल किया गया है. डॉ. अशरफ ने हाई ऐल्टिट्यूड थ्राम्बोसिस के क्षेत्र में बड़ा अनुसंधान करके सियाचिन जैसे अति उच्च स्थलों पर तैनात सैनिकों में ब्लड क्लॉटिंग की होने वाली आम समस्या के राज़ खोले हैं. इससे इस समस्या पर क़ाबू पाने में काफी सफलता मिली है.

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उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में लोगों में ब्लड क्लॉटिंग की होने वाली परेशानी में प्लेटलेट प्रोटिओम की भूमिका पर खोज की है. उनके अनुसंधान ने पहली बार यह स्थापित किया कि हिमालयी क्षेत्र में तैनात कई जवानों की नसों में थ्राम्बोसिस किन कारणों से हो जाता है जिसके चलते पैरों, दिमाग, फेफड़ों आदि में ब्लड क्लॉट हो जाता है. उनके इस अनुसंधान और खोज को अमेरिका की प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ‘प्रोसीडिंग ऑफ नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज़' में प्रकाशित किया गया है.


प्रो. अशरफ ने न सिर्फ थ्राम्बोसिस के कारणों को जाना बल्कि उसके निदान भी खोज निकाले हैं. उन्हें इस महत्वपूर्ण खोज के लिए डीआरडीओ ने साल 2014 में रिअर एडमिरल एम एस मल्होत्रा पुरस्कार से सम्मानित किया. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लिनिक फाउंडेशन ने भी उन्हें उनके अनुसंधान के लिए पुरस्कृत किया है. वह भारत की प्रतिष्ठित नेशनल अकैडमी ऑफ मैडिकल साइंसेज़ के सदस्य और इंग्लैंड के पुल्मनेरी वस्कुलर रिसर्च इंस्टिट्यूट के आंमत्रित सदस्य भी हैं.


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