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लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और अलका लांबा में तनातनी बढ़ी, अब लगाया ये आरोप

लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और विधायक अलका लांबा के बीच तनातनी बढ़ गई है.

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लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और अलका लांबा में तनातनी बढ़ी, अब लगाया ये आरोप

आम आदमी पार्टी और विधायक अलका लांबा के बीच तनातनी बढ़ गई है.

नई दिल्ली :

लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और विधायक अलका लांबा के बीच तनातनी बढ़ गई है. ताजा मामला अलका लांबा के विधानसभा क्षेत्र चांदनी चौक में होने वाली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जनसभा से जुड़ा है. दरअसल बुधवार  को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की एक चुनावी जनसभा चांदनी चौक के जामा मस्जिद इलाके में होनी है, लेकिन इलाके की विधायक अलका लांबा का कहना है कि उनको केजरीवाल की इस जनसभा की कोई जानकारी नहीं है. नाराज आप विधायक अलका लांबा ने एक बयान जारी कर कहा कि '20 फ़रवरी को मेरी विधानसभा चांदनी चौक, जामा मस्जिद गेट नम्बर 1 पर मुख्यमंत्री जनसभा करने आ रहे हैं, जिसकी मुझे कोई ख़बर नहीं है. यहां तक कि पार्टी ने पुराने चेहरे को मैदान में 2020 के लिये अभी से उतार भी दिया है, जबकि मैं एक विधायक के तौर पर आज भी पूरी तरह से जनता के बीच सक्रिय रहते हुए विकास कार्यो को आगे बढ़ा रही हूं. मुझे कमज़ोर करके पार्टी को क्या लाभ होगा? आरोप मुझ पर लगाये जा रहे हैं कि मैं कांग्रेस में जा सकती हूं, जबकि कांग्रेस से गठबंधन में कोई और ही किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार बैठा है..जो सबके सामने भी है. मुझे जनता ने चुना है, जनता के लिये यूं ही समर्पित रहते हुए अपने काम जारी रखूंगी'. 

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आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी और विधायक अलका लांबा के बीच मतभेद बीते 2 महीनों से लगातार बना हुआ है. दिसंबर के आखिर में दिल्ली विधानसभा में भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न सम्मान वापस लिए जाने का एक प्रस्ताव पास किया गया था. आम आदमी पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधायक अलका लांबा ने दिल्ली कांग्रेस के एक नेता के कहने पर यह प्रस्ताव बिना पार्टी की सहमति के सोमनाथ भारती के जरिए 1984 हिंसा संबंधित मूल प्रस्ताव में शामिल करवाया, जिससे पार्टी की फजीहत हुई. हालांकि आम आदमी पार्टी की तरफ से औपचारिक रूप से अलका लांबा के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है. जबकि अलका लांबा का तभी से ये कहना है कि 'मैंने इस प्रस्ताव का विरोध किया था और सदन से बाहर चली गई थी'.

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दिल्ली विधानसभा की रिकॉर्डिंग में भी यह साफ नज़र आया कि पार्टी के तिलक नगर विधायक जनरल सिंह ने इस प्रस्ताव को पढ़ा था जबकि अलका लांबा सदन से बाहर निकल गई थी. इस मामले से आम आदमी पार्टी की जो फजीहत और किरकिरी हुई उससे नाराज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अलका लांबा को इस्तीफ़ा देने तक को कह डाला था, हालांकि फिर पार्टी के दूसरे नेताओं के बीचबचाव के बाद मामला कुछ शांत हुआ था. लेकिन इस मामले के बाद अलका लांबा ने सवाल भी उठाए कि पार्टी ने उनको व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया है और अरविंद केजरीवाल ने टि्वटर पर उनको फॉलो भी करना बंद कर दिया है. ऐसे में पार्टी उनको लेकर अपना रुख साफ़ करे, लेकिन पार्टी ने अल्का लांबा को लेकर फिलहाल औपचारिक रूप से चुप्पी साधी हुई है.

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