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अरविंद केजरीवाल सरकार की प्रीमियम बस योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, एसीबी ने शुरू की जांच

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अरविंद केजरीवाल सरकार की प्रीमियम बस योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, एसीबी ने शुरू की जांच

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने केजरीवाल सरकार की नई शुरू होने वाली एप्प बेस्ड प्रीमियम बस सर्विस योजना की जांच शुरू कर दी है। ये योजना बुधवार 1 जून से लागू होने थी।

बीजेपी नेता और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने एसीबी में शिकायत की जिसके बाद ये जांच शुरू हुई। विजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि "दिल्ली सरकार ने इस योजना में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। एलजी के नाम से नोटिफिकेशन जारी हुआ लेकिन एलजी को बताया तक नहीं गया और कुछ प्राइवेट बस कंपनियों और दिल्ली सरकार के बीच सांठगांठ है जो जांच में सामने आएगी"

"खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ये स्कीम लाई गई''
एसीबी के जॉइंट कमिश्नर मुकेश मीणा के मुताबिक़ शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि "खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ये स्कीम लाई गई, हमने जांच शुरू कर दी है।"

दरअसल दिल्ली सरकार ने अप्रैल महीने में एप्प बेस्ड प्रीमियम बस पॉलिसी का ऐलान किया जिसके तहत प्राइवेट बस कंपनी अपना रजिस्ट्रेशन कराकर दिल्ली में सुविधायुक्त बसें चला सकती हैं।

दिल्ली सरकार ने एप्प बेस्ड प्रीमियम बसों के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया
20 मई 2016 को दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट विभाग के कमिश्नर संजय कुमार ने एप्प बेस्ड प्रीमियम बसों के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया। जिसमें कहा गया कि नोटिफिकेशन एलजी के आदेश के तहत निकाला गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक आज यानि 1 जून से दिल्ली में एप्प बेस्ड प्रीमियम बस सर्विस स्कीम लांच होनी थी।

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मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ : एलजी
नोटिफिकेशन होने की खबर जब एलजी नजीब जंग को लगी तो उन्होंने इस मामले की फ़ाइल दिल्ली सरकार से मंगाई। एलजी ने इस बात पर आपत्ति की कि (एक) इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और (दूसरा) उनको बिना बताये और बिना दिखाए दिल्ली सरकार ने उनके नाम से नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसलिए एलजी ने दिल्ली सरकार की इस योजना पर फिलहाल रोक लगा दी।

क्‍या कहती है दिल्‍ली सरकार का...
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का कहना है, "हमारे देश की संवैधानिक संरचना ही ऐसी है कि किसी भी चपरासी तक की नियुक्ति के आदेश पर राष्ट्रपति या राज्यपाल का नाम होता है। इस बात की जांच करना चाहें कर लें, हमको कोई आपत्ति नहीं या डर नहीं है। लेकिन कोई काम ना होने पाये इसके लिए ये लोग रोज़ नए रोड़े अटकाने के लिए चालाकी से कुछ ना कुछ सोचकर बैठ जाते हैं।"


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