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MCD से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने मंजूरी के बिना ही फीस बढ़ाई : जनहित याचिका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर आप सरकार से जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि एमसीडी से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने बिना पूर्व मंजूरी के ही फीस बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन किया है.

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MCD से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने मंजूरी के बिना ही फीस बढ़ाई : जनहित याचिका

याचिका में दावा किया गया है कि अधिकतर निजी स्कूलों ने सालाना रिटर्न दाखिल नहीं किया है.

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर आप सरकार से जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि एमसीडी से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने बिना पूर्व मंजूरी के ही फीस बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन किया है जबकि उन्हें विभिन्न शर्तों के साथ रियायती दर पर जमीन दी गई थी.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने आम आदमी पार्टी सरकार तथा नगर निकायों को नोटिस जारी किया. पीठ ने उनसे याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब देने को कहा. याचिका में यह दावा भी किया गया है कि अधिकतर निजी स्कूलों ने अपना सालाना रिटर्न दाखिल नहीं किया है. याचिकाकर्ता एनजीओ 'जस्टिस फॉर ऑल' ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में स्कूलों को संचालित करने वाली सोसाइटियों के रिटर्न दाखिल किए गए हैं जबकि कुछ मामलों में बिना ऑडिट वाले खाते दाखिल किए गए.

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा कानून और नियमों के अनुसार हर स्कूल को अपना सालाना रिटर्न दाखिल करना है. याचिका में दिल्ली सरकार और नगर निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिए जाने की मांग की गयी है कि निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त और रियायती दरों पर जमीन हासिल करने वाले स्कूल विभाग से पूर्व अनुमति के बिना फीस नहीं बढाएं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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