'भूतिया शहर' में तब्‍दील हुआ दिल्‍ली हिंसा में सबसे ज्‍यादा प्रभावित शिव विहार

24 फरवरी को नागरिकता कानून के विरोधियों और समर्थकों के बीच शुरू हुई हिंसा में सबसे ज्‍यादा प्रभावित शिव विहार ही हुआ.

'भूतिया शहर' में तब्‍दील हुआ दिल्‍ली हिंसा में सबसे ज्‍यादा प्रभावित शिव विहार

तबाही के मंजर देखकर यकीन करना मुश्किल होता है कि ये देश की राजधानी का हिस्‍सा है

खास बातें

  • पीड़ि‍तों की मदद को आगे आए कई परिवार
  • कई पीड़ि‍त अपने परिवार के भविष्‍य को लेकर चिंतित
  • हिंसा में 40 से ज्‍यादा लोगों की जान चली गई
नई दिल्ली:

जले हुए घर, दुकानें, गाड़ियां और वीरान गलियां. कहीं भी कोई नजर नहीं आता. जो कभी उत्तर पूर्वी दिल्‍ली के शिव विहार की सबसे हलचल वाली कॉलोनी हुआ करती थी, अब वो एक भूतिया शहर की तरह हो गई है. तबाही के मंजर देखकर यकीन करना मुश्किल होता है कि यह इस देश की राजधानी का ही कोई मोहल्‍ला है. 24 फरवरी को नागरिकता कानून के विरोधियों और समर्थकों के बीच शुरू हुई हिंसा में सबसे ज्‍यादा प्रभावित शिव विहार ही हुआ. इस हिंसा में 40 से ज्‍यादा लोगों की जान चली गई जबकि 100 से ज्‍यादा चोटिल लोग अब भी अस्‍पताल में हैं.

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प्रत्‍यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ आई और हर चीज को जलाती चली गई. अपने जलते हुए घरों को छोड़कर दंगाइयों से बचते हुए सैकड़ों परिवारों ने पास के इंदिरा विहार इलाके में शरण ली जहां के लोगों ने इन पीड़ितों को खुले दिल से अपने घरों में पनाह दी. 40 साल की मुमताज बेगम और उनके परिवार पर दंगाईयों ने तेजाब से हमला किया. वो कहती हैं, 'हम सभी घर में ही थे जब दंगाई आ धमके. उन्‍होंने तेजाब फेंका जो मेरे पति के चेहरे पर गिरा. मेरी 20 साल की बेटी अनम भी उनके बगल में ही खड़ी थी. तेजाब मेरी बेटी के चेहरे पर भी गिरा. हमने किसी तरह खुद को बचाया और मस्जिद की तरफ भागे, जहां हमने रात गुजारी. मैं अब भी उन्‍हीं कपड़ों में हूं जो पहनकर भागी थी. हमने 100 नंबर डायल भी किया लेकिन कोई नहीं आया.'

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28 साल की शाहबानों अपने 15 दिन के बेटे के साथ एक आश्रय गृह में हैं और अपने परिवार को भविष्‍य को लेकर डरी हुई हैं. उन्‍होंने कहा, 'हमारे घर के बाहर कई दिनों तक हिंसा हुई. हम सभी बत्तियां बुझाए रखते थे ताकि दंगाई ये न जान पाएं कि हम अंदर ही हैं. मुझे डर लगता था कि अगर मेरा बेटा जाग गया और उन्‍होंने उसका रोना सुन लिया तो हम पर हमला कर देंगे. जब उन्‍होंने हमारे पड़ोस के घर को जला दिया तो हम अपनी जान बचा कर भागे. बाद में उन्‍होंने हमारे घर को भी जला दिया. मुझे नहीं पता अब क्‍या होगा. हमारा सब खत्‍म हो गया.'

ये तो 50 वर्षीय नफीस अहम सैफी जैसे लोग हैं जिन्‍होंने अपने घरों को खोल दिया और ऐसे लोगों को बचाया. उन्‍होंने कहा, 'मैंने हिंसा देखी और देखा कि कैसे इन परिवारों को मदद की दरकार है. इसलिए मदद की पेशकश की. मैंने अपने परिवार को घर के दूसरे मालों पर भेज दिया और ग्राउंड फ्लोर का यह पूरा हॉल अब इन बेघर लोगों के लिए है.'

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शनिवार को मेडिकल राहत टीमें और दिल्‍ली अल्‍पसंख्‍यक आयोग के सदस्‍य भी ऐसे घरों में पहुंचे और हिंसा ग्रस्‍त इलाकों में हुए नुकसान का जायजा लिया. दिल्‍ली अल्‍पसंख्‍यक आयोग की सदस्‍य अनसतासिया गिल ने कहा, 'हम बड़े पैमाने पर हुई बर्बादी देख सकते हैं. मैं एक कैथलिक नन भी हूं. हम होली फैमिली अस्‍पताल के साथ मिलकर मेडिकल सहायता व एंबुलेंस इन इलाकों में भेज रहे हैं. पहली प्राथमिकता चिकित्‍सीय सहायता पहुंचाना है. दूसरा, अगले कुछ हफ्तों तक बेघर हुए लोगों के लिए भोजन मुहैया कराना और तीसरा इन परिवारों का पुनर्वास.'

देखें Video: दिल्ली हिंसा में बुरी तरह झुलस गया 'शिव विहार'

 

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