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झूठ का पुलिंदा है शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट, यहां सभी काम कानून के मुताबिक हुए हैं : स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन

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झूठ का पुलिंदा है शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट, यहां सभी काम कानून के मुताबिक हुए हैं : स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट का झूठ का पुलिंदा बताया है (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. शुंगलू कमेटी ने सतेंद्र जैन की बेटी सौम्या की नियुक्ति पर उठाए हैं सवाल
  2. सतेंद्र जैन का दावा कि सौम्या ने 2-3 महीने बिना वेतन के काम किया
  3. स्वास्थ्य मंत्रालय में केवल 10 फीसदी हैं डॉक्टर, बाकि गैर डॉक्टरी पेशे से
नई दिल्ली: शुंगलू कमेटी ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कामकाज पर उंगली उठाई है और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार द्वारा की गई नियुक्तियों और आवंटनों पर सवाल खड़े किए हैं. दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा कि यह सब चुनावी साजिश है. सरकार ने सभी काम नियमों के मुताबिक किए हैं.

बता दें कि शुंगलू कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार के पद पर स्वास्थ्य मंत्री की बेटी सौम्या जैन की नियुक्ति को गलत ठहराया है. वहीं, महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को आवास मुहैया कराने और आम आदमी पार्टी को कार्यालय आवंटित कराने पर सवालिया निशान उठाए हैं.

कमेटी की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि शुंगलू कमेटी दिल्ली सरकार को घेरने के लिए ही बनाई गई थी और कमेटी ने अपना काम बखूबी किया है. उन्होंने रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा करार देते हुए कहा कि सौम्या को स्वास्थ्य विभाग में नहीं रखा गया है. उसे एक निदेशक के सलाहकार के तौर पर रखा गया था. केंद्र सरकार से उसकी मंजूर ली गई थी. सभी कुछ कानून के मुताबिक हुआ है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय में केवल 10 फीसदी ही डॉक्टर काम करते हैं. 90 फीसदी लोग गैर डॉक्टरी पेशे से आते हैं. सतेंद्र जैन ने बताया कि सौम्या ने 2-3 महीने ही काम किया है और वह भी बिना वेतन के. लेकिन इस मुद्दे को चुनावों के समय जानबूझ कर उछाला जा रहा है.

स्वाति मालिवाल के घर के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने विवेक पर उन्हें घर आवंटित किया था और यह सब उपराज्यपाल को बता कर किया गया था. उन्होंने सवाल किया कि अगर उपराज्यपाल को कोई आपत्ति थी तो उन्हें सरकार को बताना चाहिए था. इसके लिए कमेटी बैठाने की जरुरत क्या थी.


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