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दिल्ली में ट्रैफिक जाम के मुद्दे पर SC ने दिल्ली पुलिस-पीडब्ल्यूडी को लगाई फटकार

दिल्ली में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सड़कों से अतिक्रमण हटाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, PWD और एजेंसियों को फटकार लगाई है. 

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दिल्ली में ट्रैफिक जाम के मुद्दे पर SC ने दिल्ली पुलिस-पीडब्ल्यूडी को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, PWD और एजेंसियों को फटकार लगाई है.

नई दिल्ली : दिल्ली में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सड़कों से अतिक्रमण हटाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, PWD और एजेंसियों को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के हालात सुधारने के लिए कुछ नहीं हो रहा है. कोर्ट को टाइमलाइन चाहिए कि कब तक अतिक्रमण हटाया जाएगा और यातायात सुचारू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि पुलिस थानों के अंदर व बाहर गाड़ियां व दूसरा सामान पड़ा है. उनके लिए क्या पॉलिसी है ? अगर नहीं है तो बनाई जाए और चार हफ्ते में बताएं कि क्या किया जाएगा. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसियों से कहा है कि वो चार हफ्ते में बताएं कि दिल्ली में यातायात सुचारू करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने PWD के चीफ इंजीनियर से कहा कि मिंटो रोड पर हर साल बरसात में बसें डूबती हैं, लेकिन विभाग के पास कोई योजना नहीं है. 

दिल्ली में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए हटाए जाएं सड़कों से अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक फिल्म में 'तारीख पे तारीख का जिक्र था'. उसी तरह की तरह ये मीटिंग पे मीटिंग चल रहा है. एक दो या तीन नहीं बल्कि एजेंसियों के बीच 54 मीटिंग हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. दिल्ली पुलिस ने ही अतिक्रमण को लेकर रिपोर्ट बनाई थी तो क्या वो आगे व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदार नहीं है? कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से पूछा कि पुलिस द्वारा जब्त वाहनों को रखने के लिए क्या पॉलिसी है ? थानों पर ही इस तरह के वाहनों की लाइन लगी है और पुलिस कहती है वो केस कोर्ट में चल रहे हैं. कई थानों में ये हालात हैं और कई साल से कोर्ट में केस खत्म हो चुके हैं. इसके बावजूद कबाड] पडे हुए हैं. कोर्ट ने कहा कि आपके थानों में ही ये हालात हैं तो बाहर की क्या बात करें. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर  और PWD के चीफ इंजीनियर कोर्ट में पेश हुए थे. 

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गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में  नाराज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तलब किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में अतिक्रमण और बॉटल नेक सडकों को दुरुस्त करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स की फरवरी 2017 की रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ? कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के लोगों की भलाई के लिए पुलिस कमिश्नर आएं और बताएं कि इस रिपोर्ट पर अमल क्यों में देरी हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वो उपराज्यपाल को भी बुला सकता है या फिर इस चपरासी को जो फाइल लाने- ले जाने का काम करता है. दरअसल दिल्ली में जाम के झाम से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. दिल्ली सरकार ने EPCA (envioronment pollution control authority) की रिपोर्ट  के आधार पर अपने हलफनामें में कहा कि छोटी समस्याएं मसलन जिन जगहों पर अतिक्रमण करके खोमचे- रेहड़ी पटरी वालो ने जगह घेर रखी है उनको 2 महीने में हटा दिया जाएगा. 

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जहां  फ्लाईओवर, अंडर पास की जरूरत है उसके लिए 6 महीने में सभी सम्बंधित विभागों और अधिकरणों से मंज़ूरी ले लेंगे. निर्माण कार्य में 2 साल में पूरा कर लेंगे. दरअसल EPCA ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली में जाम की समस्या की रिपोर्ट दाखिल की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कमेटी बनाने के लिए कहा था.  इस कमेटी ने 77 कॉरिडोर को चिह्नित किया था जिसमे 27 जगहो पर गंभीर समस्या बताई थी. दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक बस के लिए चार्जिंग पॉइंट्स की समुचित जगहों की पहचान कर ली है. ये पॉइंट्स कहां-कहां होंगे उसका भी जिक्र सरकार ने अपने हलफनामे में किया है. 
 
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