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लोन डिफाल्टर हुए विजय माल्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 14 जुलाई को

बैंकों ने मांग की है कि 40 मिलियन यूएस डॉलर जो डिएगो डील से मिले थे उनको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.

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लोन डिफाल्टर हुए विजय माल्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 14 जुलाई को

सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था.

खास बातें

  1. 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था
  2. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई
  3. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.
बैंकों से लोन को लेकर डिफाल्टर हुए किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या अवमानना मामले की आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है. कोर्ट में नोटिस के बावजूद माल्या पेश नहीं हुए. सुनवाई के दौरान केंद्रीय गृमंत्रालय की ओर से वकील भी नहीं आए.

9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था क्योंकि उन्होंने संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया. इससे पहले कोर्ट ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था. इस दौरान सजा पर सुनवाई होगी.

9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना और डिएगो डील से माल्या को मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था. बैंकों ने मांग की है कि 40 मिलियन यूएस डॉलर जो डिएगो डील से मिले थे उनको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माल्या से पूछा था कि आपने जो कोर्ट में अपनी सम्पतियों के बारे में जानकारी दी थी वो सही है या नहीं ? क्या आपने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन तो नहीं किया ? क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि माल्या बिना कोर्ट के अनुमति कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश को कैसे लागू किया जा सकता है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.

विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है,  बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था.  सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
 
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.

बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.

SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
 
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है.  माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.


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