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वातावरण में घुला ज़हर अगर कर रहा है बीमार तो एम्स की लैब बता देगी

ज़हरीली हवा, पानी या खाने ने अगर आपको बीमार किया है तो एम्स की ये लैब बता देगी. पर्यावरण में घुले ज़हर से होने वाली बीमारी पता लगाने को लेकर देश की ये पहली लैब है.

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वातावरण में घुला ज़हर अगर कर रहा है बीमार तो एम्स की लैब बता देगी

पर्यावरण में घुले ज़हर से होने वाली बीमारी पता लगाने को लेकर देश की ये पहली लैब है

नई दिल्‍ली:

Pollution: अगर पर्यावरण में घुले ज़हर ने आपको बीमार किया है तो एम्स (AIIMS) उसका पता अपने Clinical Ecotoxicology lab से लगा लेगा. मरीज़ के सैंपल से मर्ज़ के कारण का पता चलेगा और कोशिश है कि परिवार का कोई और भी उस वजह से बीमारी की चपेट में न आ पाए. ज़हरीली हवा, पानी या खाने ने अगर आपको बीमार किया है तो एम्स की ये लैब बता देगी. पर्यावरण में घुले ज़हर से होने वाली बीमारी पता लगाने को लेकर देश की ये पहली लैब है. एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि चाहे एयर पॉल्युशन की बात करें. Soil पॉल्युशन की बात करें. वाटर पॉल्युशन की बात करें. जितना प्योर हमारा एनवायरनमेंट 30-40 साल पहले था, वैसा तो अब नहीं रहा. तो जो ज़हर वातारण में मौजूद है और लोगों को बीमार कर रहा है उसका पता अलग अलग सैंपल के ज़रिए लगाया जाए.

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अक्सर हमने देखा भी है और सुना भी कि बिना किसी लत के भी लोग उस बीमारी की गिरफ्त में होते हैं जो शायद उन्हें नहीं होनी चाहिए. पर्यावरण में घुला ज़हर भी लोगों को बीमार कर रहा है और उस वजह को ये लैब पता लगा रही है.
एम्स की ये लैब करीब 1 करोड़ की लागत से तैयार हुई है जिसके जरिये सैंपल में हेवी केमिकल्स की मौजूदगी का पता लगाया जा रहा है. सैंपल के लिए मरीज़ों को 25 रुपये से लेकर 1500 रुपये देने होंगे. Ecotoxicology विभाग के डॉ. जावेद ए कादिरी ने इस बात की पुष्टि की कि करीब 262 सैंपल में से 32 सैंपल पॉजिटिव आये हैं जिसमें अलग अलग एलिमेंट्स की मौजूदगी आई है.

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आर्सेनिक, floride, लेड, कैडमियम, मैगनीज़, आयरन जैसे हैवी मेटल्स की मौजूदगी मिली है. इससे कैंसर, किडनी की बीमारी, बच्चों में ऑटिज़्म जैसी समस्या दिखी है. बीमारी के बढ़ते ग्राफ के बीच वजहों को तलाशने की ये कोशिश इस बात को लेकर है कि परिवार में उनको आगाह किया जाए जो अनजाने में उस चीज का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसने उनके किसी अपने को बीमार किया है.

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